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141 साल पुराना टेनिस टूर्नामेंट है विंबलडन

एजेंसी | लंदन

टेनिस का सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट-विंबलडन। 141 साल से खेला जा रहा है। रुतबा ऐसा कि सबसे प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट माना जाता है। पर पैसे देने में आनाकानी, वो भी खिलाड़ी या मैनजमेंट को नहीं, बल्कि सफाई वालों को। 300 करोड़ रुपए प्राइजमनी वाले विंबलडन पर रोज के 360 रु. के घपले का आरोप है।

15 जुलाई को खत्म हुए विंबलडन में इस बार करीब 1800 सफाईकर्मियों को कोर्ट से लेकर दर्शकों के बैठने की जगह तक की साफ-सफाई का जिम्मा दिया गया था। रोज का 15 पाउंड (1,350 रुपए) का मेहनताना तय किया गया था। लेकिन टूर्नामेंट खत्म हुआ तो सबको भुगतान 11 पाउंड (990 रु.) के रेट से किया गया। यानी सफाई वालों का रोज का 360 रु. का नुकसान। सफाई स्टाफ ने विंबलडन एसोसिएशन और टूर्नामेंट में साफ-सफाई का ठेका लेने वाली कंपनी कंपास तक शिकायत पहुंचा दी है। शिकायतें और भीं हैं। जैसे- डे-शिफ्ट का कहकर रात भर काम करा लिया गया। नाइट शिफ्ट का अलग से भुगतान भी नहीं किया। रोज 15-15 घंटे तक काम कराया गया। ये तो पैसे की बात थी, लेकिन विंबलडन की सफाई वालों से बेरुखी खाने तक में झलकी। उन्हें एक वक्त का खाना देने का वादा था। वो भी भरपेट नहीं मिला। जो कुछ मिला, वो भी बासी। आधा पेट खाना खाने के लिए भी सफाई वालों को वक्त ही नहीं मिलता था। उनके खाना खाने और आराम के लिए ना तो कोई समय तय था, ना कोई जगह। सफाईकर्मी टेनिस क्लब के गलियारे में ही लेटकर आराम कर लेते।

विंबलडन की ओर से इस पर कोई बयान नहीं आया है। हालांकि सफाई कंपनी कैंपस का कहना है कि- हम अपने सभी कर्मियों से एक जैसा व्यवहार रखते हैं। फिर भी अगर किसी को कोई शिकायत है, तो हम उसे सुनेंगे।

दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित टेनिस टूर्नामेंट-विंबलडन; प्राइज मनी-300 करोड़ रु., आरोप- सफाई वालों के रोज के 360 रु. के घपले का

1800 सफाईवालों ने कहा- ना भरपेट खाना मिला, ना खाने का वक्त; डे-शिफ्ट का बोल रात में भी काम करा लिया…

विंबलडन को इन वजहों से सबसे प्रतिष्ठित माना जाता है…

ये लंदन का ऑल इंग्लैंड टेनिस लॉन है।

टेनिस का सबसे पुराना टूर्नामेंट। 1877 में शुरुआत हुई। 141 साल में 132 एडीशन खेले गए हैं।

ड्रेस कोड। खिलाड़ी के हर कपड़े का एक ही रंग- सफेद। टोपी और मोजे तक सफेद ही होंगे।

कोई खिलाड़ी महिला-पुरुष या लड़का-लड़की नहीं है। लेडीज एंड जेंटलमैन कहा जाता है।

बॉल बॉय और गर्ल्स (बीबीजी) का कॉन्सेप्ट भी सबसे पहले विंबलडन से ही निकला था।

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