Today on Ganadhipa Sankashti Chaturthi 2025- आज देशभर में भगवान गणेश के गणाधिप स्वरूप की आराधना का शुभ दिन मनाया जा रहा है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान के साथ गणपति बप्पा की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है जो हर शुभ कार्य से पहले स्मरण किए जाते हैं। उनके गणाधिप रूप की उपासना से मनुष्य के जीवन में आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, वहीं घरों में भक्तों ने भक्ति गीतों और आरती के साथ गणपति की आराधना प्रारंभ की।
http://Best laptops for students- दमदार परफॉर्मेंस और Windows 11 के साथ 13% डिस्काउंट पर!
गणाधिप स्वरूप की पूजा का महत्व
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, गणाधिप स्वरूप गणेश जी का वह रूप है जिसमें वे समस्त गणों के अधिपति यानी राजा के रूप में पूजे जाते हैं। यह रूप शक्ति, विवेक और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक शास्त्रों का कहना है कि इस दिन गणपति के इस स्वरूप का पूजन करने से वह साधक को बुद्धि, ज्ञान और कार्य सिद्धि प्रदान करते हैं। स्कंद पुराण और गणेश पुराण में इसका विशेष उल्लेख मिलता है कि गणेश जी के इस रूप का ध्यान करते हुए अगर व्यक्ति उपवास करे तो उसके जीवन से विघ्न, रोग और क्लेश दूर होते हैं।
http://32 इंच 4K मॉनिटर में HDR10, वॉयस असिस्टेंट, गेमिंग हब और दमदार कनेक्टिविटी के साथ
उपासना का शुभ मुहूर्त और विधि-विधान
पंडितों के अनुसार इस वर्ष गणाधिप गणेश पूजा का शुभ समय प्रातः 6:52 बजे से आरंभ होकर दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। पूजा से पहले भक्त स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और भगवान गणेश की प्रतिमा को आसन पर स्थापित कर पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजन करते हैं। मोदक, दूर्वा, लाल फूल और सिंदूर इस दिन विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं। गणपति उपासना के दौरान गणेश मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का जाप कम से कम 108 बार करने की परंपरा है। शुद्ध मन और आस्था के साथ की गई यह साधना जीवन में नई ऊर्जा भरती है।



