दिल्ली। 2017 के उन्नाव रेप कांड की पीड़िता और उनकी मां को मंगलवार शाम इंडिया गेट के पास से दिल्ली पुलिस ने हटा दिया। महिला कार्यकर्ता योगिता भयाना के साथ वे दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ धरने पर बैठी थीं, जिसमें पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी गई।
पीड़िता ने खुद कहा, ‘अदालत का ये फैसला सुनकर मैं बेहद परेशान हूं।’ करीब एक घंटे के प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उन्हें वैन में बिठाया। बाद में कर्तव्य पथ थाने पर छोड़ दिया। योगिता भयाना ने इसे न्यायिक देरी का काला अध्याय बताया।
कोर्ट का विवादास्पद फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर को सेंगर को जमानत दे दी। 15 लाख के बॉन्ड पर रिहाई, लेकिन शर्तें सख्त पीड़िता से 5 किलोमीटर दूर रहना, हर सोमवार पुलिस को हाजिर होना। अपील 15 जनवरी 2026 को सुनवाई के लिए तय।ट्रायल कोर्ट ने 2019 में सेंगर को रेप केस में उम्रकैद सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस यूपी से दिल्ली शिफ्ट हुआ था। पिता की हिरासत में मौत के केस में 10 साल की सजा अभी बरकरार, इसलिए जेल में ही हैं।विपक्ष ने बीजेपी पर निशाना साधा। कांग्रेस-सपा ने इसे न्याय के अपमान का नाम दिया। सोशल मीडिया पर न्याय की मांग तेज हो गई।
पीड़िता का पुराना दर्द
उन्नाव कांड ने 2017 में पूरे देश को हिला दिया। 17 साल की नाबालिग से गैंगरेप, फिर पिता की पुलिस कस्टडी में मौत। सेंगर पर भारी राजनीतिक रसूख का आरोप। पीड़िता के चाचा-ताऊ की भी हत्या हुई।
पीड़िता ने कहा, ‘सजा पर रोक से असुरक्षा का अहसास हो रहा।’ मां ने चिल्लाते हुए कहा, ‘हम न्याय मांग रहे हैं, दबाने की कोशिश क्यों?’ वीडियो वायरल हो गए, जहां महिला पुलिसकर्मी उन्हें घसीटती दिखीं।
योगिता भयाना, जो निर्भया केस से सक्रिय हैं, बोलीं—ये सिर्फ एक केस नहीं, महिलाओं के संघर्ष का प्रतीक। प्रदर्शन में कई और महिलाएं शामिल हुईं।
राजनीतिक तूफान उमड़ा
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनाते ने ट्वीट किया ‘सेंगर को जमानत, पीड़िता को हिरासत। ये कैसा न्याय?’ सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने केंद्र पर सवाल उठाए। बीजेपी ने सफाई दी ये कानूनी प्रक्रिया है।
वकीलों का मत अपील लंबित होने पर सजा निलंबन सामान्य, लेकिन इस केस की संवेदनशीलता को देखते हुए विवाद लाजमी। सुप्रीम कोर्ट निगरानी में ट्रायल हुआ था, अब हाईकोर्ट का फैसला ऊपर जाएगा।
पीड़िता की बहन ने कहा, ‘जेल में रहना सुरक्षित लगता है।’ परिवार को सरकारी सुरक्षा है, लेकिन डर बरकरार।
आगे क्या होगा?
अपील की अगली सुनवाई जनवरी में। सेंगर पर पाबंदियां तो हैं, लेकिन पीड़िता का भय कम नहीं। कार्यकर्ता अब जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे। ये घटना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ी कर रही—क्या रसूखबाज अपराधी हमेशा बच निकलेंगे?
