MP Health Department action against quack doctors- मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग ने बिना योग्यता और सरकारी पंजीयन के चिकित्सा कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। राज्य के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज हुरमाड़े के अनुसार, जिले के घोड़ाडोंगरी और आमला तहसील के दो क्लीनिकों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापेमारी की और उन्हें सील कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान आलोपैथिक दवाइयां, इंजेक्शन और इलाज के उपकरण बड़ी मात्रा में जब्त किए गए।http://एशिया कप 2025 “ट्रोफी चोर” , 2 नये टूर्नामेंट करवाने की तैयारी में ACC
ग्रामीण अंचलों में संकट
बैतूल के ग्रामीण इलाकों—खेड़ीसावलीगढ़, भीमपुर, चिचोली आदि में सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर लंबे समय से सक्रिय हैं और अब तक उन पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं हुई थी। आमला तहसील के ग्राम जम्बाडा में डॉ. धनराज चंदेल के क्लीनिक पर स्वास्थ्य विभाग ने छापा मारा, तो पता चला कि वह बिना किसी मेडिकल डिग्री और वैध अनुमति के अवैध रूप से मरीजों का इलाज कर रहा था। क्लीनिक से बरामद दवाइयां और उपकरण जब्त कर पूरे क्लीनिक को सील कर दिया गया।http://200MP कैमरा और गेमिंग प्रोसेसर के साथ, Vivo फ़ोन हुआ लांच.
जिले के प्रशासन की पहल
इन घटनाओं के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने सभी अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों की जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध डिग्री और पंजीयन के चिकित्सा करना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि आम लोगों की जान से भी खिलवाड़ है। अब आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है और संचालनकर्ता डॉक्टरों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।
हादसों का खतरनाक इतिहास
बैतूल सहित आसपास के जिलों में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही के भयावह परिणाम भी सामने आए हैं। अक्टूबर महीने में पास के खंडवा जिले के पिपलोद थाना में एक झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज के कारण दो साल के बच्चे की मृत्यु का मामला सामने आया था। आदिवासी संगठनों ने इस पर आक्रोश जताया और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की थी। इसी तरह, छिंदवाड़ा और अन्य जिलों में भी ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां गैरकानूनी इलाज के कारण मासूम बच्चों की जान चली गई।



