टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए 2025 चुनौतियों भरा रहा है। कमजोर मांग, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ, और एच-1बी वीजा नियमों की कड़ी सख्ती ने कंपनी की कार्यप्रणाली और बाजार प्रदर्शन पर विपरीत प्रभाव डाला है। इन सब कारकों ने निवेशकों के मन में अनिश्चितता और डर पैदा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप कंपनी के शेयर मूल्य में भारी गिरावट देखी गई है।
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कमजोर मांग और वित्तीय प्रदर्शन
2025 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की मांग में कमी आई है, जिससे कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर नकारात्मक असर पड़ा है। इस साल कंपनी के शेयर मूल्य में 30 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है, और इसका मार्केट कैपिटलाइजेशन दिसंबर 2024 के 14.81 लाख करोड़ रुपये से घटकर 10.71 लाख करोड़ रुपये रह गया है। TCS का यह सबसे निचला स्तर पिछले तीन वर्षों में देखा गया है। इस गिरावट के पीछे कम मांग, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं, तथा तकनीकी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा की गतिविधियां प्रमुख हैं।
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एच-1बी वीजा नियमों में सख्ती
TCS के लिए एच-1बी वीजा नियमों की कड़ी सख्ती भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। अमेरिकी प्रशासन ने एच-1बी वीजा के लिए फीस को $100,000 प्रति आवेदन तक बढ़ा दिया है, जो पूर्व की तुलना में कई गुना अधिक है। यह फैसला “हाई-स्किल्ड” विदेशी कर्मचारियों की संख्या सीमित करने और प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने के लिए लिया गया है। TCS, जो अमेरिका में बड़ी संख्या में वीजा पर तकनीकी कर्मचारियों को भेजती है, इस नियम से प्रभावित हुई है। इससे कॉर्पोरेट भर्ती में कमी आई है और कंपनियों को अमेरिकी बाजार में विशेषज्ञ कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।



