मेरे बयानों को गलत अनुवाद किया गया, एडवाइजरी बोर्ड से बोले सोनम वांगचुक 

sonam wangchuk tells advisory board ladakh autonomy protests – पिछले महीने लेह, लद्दाख में शांति भंग हो गई जब हजारों स्थानीय लोग राज्य के लिए विशेष संवैधानिक दर्जे (छठी अनुसूची) और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। 24 सितंबर को यह विरोध प्रदर्शन हिंसा में तब्दील हो गया, जिसमें चार लोगों की जान गई और दर्जनों घायल हुए। प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए 80 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया, इनमें आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रसिद्ध इंजीनियर और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल थे।​

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी

सरकार ने वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार किया, जिससे बिना मुकदमे के एक वर्ष तक हिरासत की अनुमति मिलती है। उन्हें लेह से राजस्थान के जोधपुर जेल में भेज दिया गया। पुलिस का आरोप है कि वांगचुक ने उग्र भाषणों के जरिए हिंसा को भड़काया, जबकि आसपास के लोग और परिजन इसे शांतिपूर्ण राज्य आंदोलन को दबाने की कोशिश बता रहे हैं।​

वायरल वीडियो विवाद

गिरफ्तारी के बाद, सोशल मीडिया पर वांगचुक के कई वीडियो वायरल हो गए। कई बड़े टीवी चैनलों और सोशल मीडिया यूज़र्स ने उनके भाषणों के कुछ हिस्सों को क्लिप किया और बताया कि उन्होंने “नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका” की तर्ज़ पर बड़ा परिवर्तन लाने की बात की। साथ ही, कुछ ने उन पर देश विरोधी और देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनने का आरोप लगाया।​

बयान का असली संदर्भ और अनुवाद

फैक्ट-चेकिंग संस्थानों और स्वतंत्र पत्रकारों ने वायरल क्लिप्स की पड़ताल की तो पता चला कि मूल भाषण लगभग 35 मिनट का था और उसमें वांगचुक ने कहीं भी हिंसा की वकालत नहीं की थी। उन्होंने कहा, “इतिहास में नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में लोगों ने कुर्बानियां देकर बड़ा बदलाव लाया, लेकिन लद्दाख को शांतिपूर्ण आंदोलन के ज़रिए अधिकार मिल सकते हैं, बिना हिंसा के, बिना पत्थरबाजी के।” क्लिप में उनकी बात का अर्थ बदल दिया गया और उसका गलत अनुवाद प्रस्तुत किया गया।

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