1 अगस्त से देशभर में डिजिटल भुगतान करने वालों के लिए कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किया गया है। सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने भारतीय उपभोक्ताओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। UPI आधारित ऐप्स जैसे Google Pay, PhonePe और BHIM का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों यूजर्स को अब अपने लेन-देन की आदतों में बदलाव करना पड़ सकता है।
ऑटो-डेबिट सुविधाओं में संशोधन
नए नियमों के तहत, अब ऑटो-डेबिट (Recurring Payment) के लिए हर ट्रांजैक्शन से पहले ग्राहक को प्रामाणिकता (authentication) देना जरूरी होगा। यानी कि मासिक सब्सक्रिप्शन, मोबाइल रिचार्ज, ओटीटी प्लेटफॉर्म या अन्य सर्विसेज के लिए ऑटो-डेबिट का इस्तेमाल करते वक्त अतिरिक्त सुरक्षा OTP, पिन या बॉयोमेट्रिक तरीके से लेन-देन की पुष्टि करनी होगी। इससे धोखाधड़ी की संभावनाएं कम होंगी और उपभोक्ता को अपनी सहमति पर अधिक नियंत्रण मिलेगा।
भुगतान की सीमा पर नए नियम
अब एक दिन में UPI के जरिए किए जाने वाले भुगतानों की सीमा में भी बदलाव किया गया है। खासकर, बड़े अमाउंट की पेमेंट जैसे प्रॉपर्टी बुकिंग, एजुकेशन फीस या हेल्थकेयर बिल्स के लिए अलग-अलग लेन-देन लिमिट निर्धारित की गई है। उदाहरण के तौर पर, कुछ बैंक और ऐप्स ने दैनिक UPI लिमिट को 1 लाख रुपये तक सीमित कर दिया है, वहीं कुछ स्पेशल ट्रांजैक्शन के लिए इसकी सीमा को 5 लाख रुपये तक बढ़ाया गया है। इससे UPI के माध्यम से होने वाले उच्च-मूल्य के फंड ट्रांसफर को सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
निष्क्रिय UPI खातों के लिए नई गाइडलाइन
नए नियमों के अनुसार, जो UPI यूजर्स पिछले एक साल से निष्क्रिय हैं यानी जिनका UPI आधारित लेन-देन नहीं हुआ है, उनके खातों को अस्थायी रूप से सस्पेंड किया जा सकता है। ऐसे खातों को दोबारा सक्रिय करने के लिए केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यह बदलाव सुरक्षा की दृष्टि से किया गया है ताकि अनावश्यक गलत लेन-देन और साइबर फ्रॉड को रोका जा सके।
ट्रांजैक्शन फीस और भुगतान प्रोसेसिंग चार्ज में बदलाव
UPI भुगतान के लिए लागू होने वाले प्रोसेसिंग चार्ज और सर्विस फीस में भी कुछ बदलाव किए गए हैं। खासतौर पर, बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) और हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर मामूली शुल्क या इंटरचेंज फीस लागू की गई है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए P2P (पर्सन टू पर्सन) ट्रांजैक्शन ज्यादा प्रभावित नहीं होंगे, परंतु मर्चेंट ट्रांजैक्शन की लागत में थोड़ा इजाफा हो सकता है।