शुक्रवार, 8 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान के पूर्वजों से जुड़े शाही संपत्ति विवाद मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। यह रोक उस आदेश पर लगी है जिसमें हाईकोर्ट ने नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्ति से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद को नए सिरे से सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट भेजने का निर्देश दिया था।
बीस साल पुराने फैसले पर फिर शुरू हुआ विवाद
मामले का आधार नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्ति है, जिसकी कानूनी लड़ाई पिछले कई दशकों से चल रही है। साल 2000 में ट्रायल कोर्ट ने फैसला दिया था कि नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान, उनके पुत्र (पूर्व क्रिकेट कप्तान मंसूर अली खान) और उनकी संतानों—सैफ अली खान, सोहा अली खान, सबा सुल्तान और शर्मिला टैगोर—ही इस संपत्ति के कानूनी वारिस होंगे। इस फैसले को हाईकोर्ट ने हाल ही में पलट दिया और मामला फिर से ट्रायल कोर्ट को भेज दिया, जिससे परिवार के अधिकारों पर संकट उत्पन्न हो गया था।
हाईकोर्ट में सामने आए नए दावेदार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के इस फैसले को नवाब हमीदुल्लाह खान के भाई ओबैदुल्लाह खान के वंशजों और नवाब की तीसरी बेटी राबिया सुल्तान के परिवार ने चुनौती दी। उनकी दलील थी कि नवाब की निजी संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार होना चाहिए, जिसमें संपत्ति सभी बच्चों और भाइयों में बांटी जाती है, न कि केवल बड़े उत्तराधिकारी को दी जाती है। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए, मुस्लिम पर्सनल लॉ के आधार पर बंटवारे की सुनवाई के लिए केस वापस भेजा था।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और कानूनी पेचीदगी
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में हाईकोर्ट का फैसला रोकते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा है कि पक्षकार अगले चार हफ्तों में अपनी प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। अब मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा फिर से सुना जाएगा, जिससे सैफ अली खान और उनके परिवार को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि संपत्ति के मामले में कोई तीसरा पक्ष अधिकार नहीं बना सकता, यानी बंटवारे के प्रति कोई बिक्री, लीज या ट्रांसफर नहीं हो सकता जब तक अंतिम फैसला ना हो जाए।