Madhya Pradesh

CAG report fertilizer fund- MP में किसानो के 90% फंड का इस्तेमाल, सरकारी गाड़ियों के इधन के लिए हुआ!

मध्य प्रदेश में किसानों के कल्याण के लिए निर्मित ‘उर्वरक विकास कोष’ (फर्टिलाइजर डेवलपमेंट फंड) गंभीर सवालों के घेरे में है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि यह कोष, जिसका उद्देश्य किसानों की मदद, प्रशिक्षण और कृषि सुधार था, पिछले पांच वर्षों में सरकारी अफसरों की गाड़ियों के लिए ईंधन और रखरखाव पर ही खर्च होता रहा। 

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रिपोर्ट के मुताबिक, 2017-18 से 2021-22 तक कुल 5.31 करोड़ रुपये में से करीब 90% रकम—यानी 4.79 करोड़ रुपये—गाड़ियों, ड्राइवर की सैलरी और मरम्मत जैसे कामों में लगी, जबकि किसानों को सीधा लाभ देने वाली योजनाएं महज 5.10 लाख रुपये की राशि तक सीमित रह गईं।

किसानों को सीधे लाभ देने की बजाय गाड़ियाँ बनी प्राथमिकता

रिपोर्ट में साफ दर्शाया गया है कि राज्यस्तर पर खर्च हुए 2.77 करोड़ रुपये में से 2.25 करोड़ सिर्फ 20 वाहनों पर और उनसे जुड़ी सेवाओं पर लगे। कोष की स्थापना का असल मकसद था प्राकृतिक आपदा के समय किसानों को फर्टिलाइजर सब्सिडी, प्रशिक्षण और नए उपकरण उपलब्ध कराना, लेकिन खर्च के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि किसानों की जरूरतों के बजाय प्रशासनिक सुविधाओं को तरजीह दी गई। जिम्मेदार अधिकारियों ने वाहनों की आवश्यकता ‘मॉनिटरिंग’ के लिए बताई, मगर कैग ने इसे अनुचित माना और कोष के वास्तविक उद्देश्य की अनदेखी करार दिया।

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किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ, कोष प्रबंधन में लापरवाही

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य की मार्कफेड द्वारा खरीदे गए उर्वरकों पर सप्लायर रीबेट्स किसानों तक नहीं पहुंचाए गए, जिससे उन्हें अतिरिक्त 10.50 करोड़ रुपये तक का खर्च उठाना पड़ा। साल 2021-22 में फर्टिलाइजर ऊँचे दाम पर खरीदा गया और सस्ते में बेचने से मार्कफेड को 4.38 करोड़ रुपये की सीधी आर्थिक हानि हुई, जिसका असर सरकारी फंड और करदाताओं पर भी पड़ा।

बिना वैज्ञानिक डेटा के उर्वरक वितरण, खेती और जिलों की अनदेखी

कैग रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में फर्टिलाइजर की मात्रा तय करने के लिए खेतों की मृदा, फसल पैटर्न या किसी प्रकार का वैज्ञानिक विश्लेषण नहीं किया गया। हर वर्ष पिछली खपत के हिसाब से ही वितरण किया गया। नतीजतन, सब्जी, बागवानी और अन्य फसलों के तहत आने वाला बड़ा क्षेत्र उपेक्षित रहा। इस लापरवाही ने फंड के लक्ष्य को भटका दिया।

Tiwari Shivam

शिवम तिवारी को ब्लॉगिंग का चार वर्ष का अनुभव है कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में उन्होंने एक व्यापक समझ विकसित की है वे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों व दुनिया के नामी स्टार्टप्स के लिये भी काम करते हैं वह गैजेट्स ,ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, स्पेस रिसर्च ,इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ,कॉर्पोरेट सेक्टर तथा अन्य विषयों के लेखन में व्यापक योग्यता और अनुभव रखते हैं|

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