pilot project for voter list accuracy- चुनावों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने हाल ही में चार राज्यों की पांच लोकसभा सीटों पर ‘बूथ रक्षक योजना’ का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह पहल राहुल गांधी के ‘वोट चोरी अभियान’ से प्रेरित है, जिसमें बूथ रक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें मतदाता सूची में गड़बड़ी और अनियमितताओं की पहचान के लिए तैयार किया जा रहा है।
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कई राज्यों में लागू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
इस पायलट प्रोजेक्ट को राजस्थान के अलवर और जयपुर ग्रामीण, मध्य प्रदेश के मुरैना, छत्तीसगढ़ के जांजपुर-चांपा और उत्तर प्रदेश के बांसगांव लोकसभा क्षेत्रों में शुरू किया गया है। इन सीटों पर पिछली बार बहुत कम वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था, इसलिए इन क्षेत्रों को चुना गया। पार्टी ने प्रत्येक बूथ रक्षक को 10 बूथों की जिम्मेदारी दी है, और उनके अधीन 10 बूथ एजेंट काम करेंगे ताकि विस्तृत स्तर पर जांच हो सके।
मतदाता सूची में गड़बड़ी की पहचान का प्रशिक्षण
बूथ रक्षकों को सिखाया जा रहा है कि वे एक ही पते पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जोड़े जाने या एक ही नाम नए-पुराने रूप में दोहराव की पहचान कर सकें। इसके लिए टीमों को मतदाता सूची की गहन जांच और पुनरीक्षण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। केंद्रीय स्तर पर पांच सदस्यीय टीम इन बूथ रक्षकों को स्वरूप-6, 7 और 8 फॉर्म के इस्तेमाल की तकनीकी ट्रेनिंग दे रही है, जिससे यह तय किया जा सके कि किन आधारों पर नाम जोड़ा या हटाया गया है।



