Mohan Bhagwat statement on Hindu civilization- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा कि भारत में रहने वाला कोई भी व्यक्ति “अहिंदू” नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे वह किसी भी धर्म या संप्रदाय से हो, हर नागरिक का पूर्वज हिंदू सभ्यता से जुड़ा है। भागवत ने अपने भाषण में कहा कि मुस्लिम और ईसाई समाज के पूर्वज भी भारत की प्राचीन संस्कृति व सभ्यता का अंग रहे हैं। इस बयान के बाद विभिन्न वर्गों में चर्चा तेज हो गई है।
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सामाजिक एकता पर ज़ोर
आरएसएस प्रमुख ने अपने संदेश में रेखांकित किया कि भारत की सामाजिक संरचना अत्यंत विविधतापूर्ण है, लेकिन उसकी बुनियाद समान संस्कृति और साझा विरासत है। भागवत ने इस मौके पर कहा कि भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब तथा विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच ऐतिहासिक संबंध देश की एकता को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू शब्द का तात्पर्य धर्म से नहीं बल्कि जीवन शैली, संस्कृति और विचारधारा से है, जिसमें भारत के नागरिकों का स्वतः समावेश हो जाता है।
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ऐतिहासिक दृष्टिकोण
भागवत के अनुसार, यह ऐतिहासिक और वैज्ञानिक तथ्य है कि भारत में निवास करने वाले अधिकांश लोगों के पूर्वज हज़ारों वर्षों से इसी भूभाग पर रहे हैं और उनकी सांस्कृतिक जड़ें एक जैसी रही हैं। उन्होंने अपने तर्क में चर्चित इतिहासकारों और अध्येताओं का हवाला दिया, जिन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता, वेद-पुराण कालीन समाज और मध्यकालीन भारत के सांस्कृतिक मूल्यों पर महत्वपूर्ण शोध किए हैं। भागवत ने कहा कि कई मुसलमान और ईसाई परिवारों के पूर्वज भी कभी हिन्दू समाज के ही सदस्य हुआ करते थे।



