सतना शहर में हाल ही में घटी एक घटना ने न सिर्फ सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि पूरे नगरीय विकास विभाग की कार्यप्रणाली को आईने दिखा दिया। नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी जब नवनिर्मित डामर सड़क का निरीक्षण करने पहुंचीं, तो उनके पैर लगते ही सड़क की ऊपरी परत उखड़कर बिखर गई। यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोगों के बीच नगरीय विकास की लापरवाही पर बहस छेड़ दी।
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मंत्री का दौरा जो बन गया सबक
मंत्री प्रतिमा बागरी सतना जिले के मैहर क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्यों का जायजा लेने गई थीं। ठेकेदार राजेश कैला द्वारा बनाई गई यह सड़क अभी हाल ही में पूरी हुई थी। निरीक्षण के दौरान मंत्री ने सड़क पर पैर रगड़ा, तो डामर की परत इतनी कमजोर निकली कि वह तुरंत उखड़ गई। गुस्से से लाल होकर उन्होंने मौके पर ही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को फटकार लगाई और ठेकेदार का अनुबंध तत्काल रद्द करने के सख्त निर्देश जारी कर दिए। यह घटना न सिर्फ घटिया निर्माण की मिसाल बनी, बल्कि सतना जैसे विकासशील शहर में बुनियादी सुविधाओं की लापरवाही को उजागर कर दिया।
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ठेकेदार राजेश कैला पर भारी पड़ी लापरवाही
घटना के तुरंत बाद विभाग ने ठेकेदार राजेश कैला के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। उनके टेंडर को रद्द करने के अलावा विभाग ने गुणवत्ता जांच के लिए सैंपल लिए और कार्यपालन यंत्री से तीखी नोकझोंक भी हुई। PWD की दलील थी कि सड़क अभी पूरी तरह सेट नहीं हुई थी, लेकिन मंत्री ने इसे खारिज करते हुए कहा कि निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता ही इसका कारण है। राजेश कैला पर अब विभागीय जांच चल रही है और उन्हें ब्लैकलिस्ट होने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे मामलों में ठेकेदारों की लालच साफ दिखती है, जहां सस्ते डामर और कमजोर बेस से सड़कें बनाई जाती हैं जो कुछ ही दिनों में टूटने लगती हैं।
सड़क निर्माण में डामर की गुणवत्ता क्यों महत्वपूर्ण
डामर सड़कें बनाने का सबसे आम तरीका है, लेकिन इसकी मजबूती बिल्कुल सही तकनीक पर निर्भर करती है। सतना जैसी घटना में जो हुआ, वह डामर मिक्स डिजाइन की कमी और कम गुणवत्ता वाले बिटुमेन के इस्तेमाल का नतीजा लगता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी सड़क के लिए डामर का ग्रेड VG-30 या VG-40 होना चाहिए, साथ ही सही अनुपात में एग्रीगेट और फिलर मिलाना जरूरी। सतना में इस्तेमाल डामर इतना निम्न स्तर का था कि पैर के दबाव से ही उखड़ गया। मध्य प्रदेश में ऐसी सड़कें अक्सर बारिश के मौसम में ही धंस जाती हैं, जिससे हादसे बढ़ते हैं। निरीक्षण के समय सड़क की परतें सही ढंग से कॉम्पैक्ट न होने का भी खुलासा हुआ।
विभागीय लापरवाही ने बढ़ाई समस्या
लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी इस मामले में बच नहीं सके। मंत्री के निरीक्षण के दौरान कार्यपालन यंत्री ने सफाई दी कि सड़क नई है और ट्रैफिक न होने से सेटिंग पूरी नहीं हुई, लेकिन प्रतिमा बागरी ने इसे खारिज कर दिया। विभाग में सड़क निर्माण की निगरानी के लिए मोबाइल लैब और थर्ड पार्टी ऑडिट की व्यवस्था है, लेकिन सतना केस में ये कहीं नजर नहीं आए। PWD मंत्री राकेश सिंह ने पहले कहा था कि हर जिले में सैंपल चेक होंगे, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। सिंगरौली, भोपाल जैसे इलाकों में भी सड़कें धंसने की घटनाएं हुईं, जहां RE वॉल की कमजोरी जिम्मेदार थी। सतना घटना ने साबित कर दिया कि निरीक्षण नाममात्र का है।
सतना के बाद क्या सबक मिला विकास विभाग को
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने ठेकेदार के टेंडर रद्द करने के बाद सख्ती दिखाई। मंत्री ने निर्देश दिए कि सभी नवनिर्मित सड़कों का दोबारा परीक्षण हो और दोषी ठेकेदारों को चालान भेजा जाए। सतना नगर निगम ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया और अन्य सड़कों की जांच शुरू कर दी। लेकिन सवाल वही है – क्या यह सतही कार्रवाई है या स्थायी सुधार आएंगे? मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं का बड़ा कारण घटिया निर्माण ही है। प्रतिमा बागरी ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस होगी। अब देखना है कि क्या विभाग इस वादे पर खरा उतरेगा।


