सोशल मीडिया पर इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने के वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिससे लोगों में एक धारणा बन गई है कि ये गाड़ियां पेट्रोल कारों से ज्यादा खतरनाक हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय और वैश्विक आंकड़े इस मिथक को पूरी तरह से तोड़ते नजर आते हैं। अमेरिका के नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) के डेटा के मुताबिक, हर 1,00,000 बिकने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों में सिर्फ 25 आग की घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि पेट्रोल गाड़ियों में यही संख्या 1,530 तक पहुंच जाती है।
यह अंतर इतना स्पष्ट है कि पेट्रोल और डीजल वाहनों में आग लगने का खतरा EVs से 60 गुना ज्यादा पाया गया। स्वीडन की सिविल कंटिंजेंसी एजेंसी और लंदन फायर ब्रिगेड के आंकड़े भी यही कहते हैं, जहां हाइब्रिड कारों में तो यह संख्या 3,475 तक हो जाती है। पोलैंड में 2020 से 2025 के बीच 51,142 वाहन आग की चपेट में आए, जिनमें से सिर्फ 87 EVs थे, बाकी पेट्रोल-डीजल वाले।
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भारत में भी हालिया घटनाओं ने चिंता बढ़ाई है, खासकर इलेक्ट्रिक स्कूटरों में बैटरी फटने या चार्जिंग के दौरान आग लगने की खबरें। आगरा और गोपालगंज जैसी घटनाओं में जानें गईं, जहां खराब बैटरी क्वालिटी और चार्जिंग दोष मुख्य वजह बने। फिर भी, वैश्विक आंकड़ों की तुलना में भारत में EV फायर रेट कम ही है, हालांकि मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट और थर्मल मैनेजमेंट की कमी पर ध्यान देने की जरूरत है।



