why are extramarital affairs increasing in india-समाज में विवाह को हमेशा से एक स्थायी और पवित्र बंधन माना गया है, लेकिन बदलते समय के साथ रिश्तों की परिभाषा और प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं। आजकल एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण बदलती जीवनशैली, डिजिटल कनेक्टिविटी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बढ़ती चाहत और दांपत्य जीवन में असंतोष है।
सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने लोगों के लिए नए संबंध बनाना बेहद आसान कर दिया है, जिससे विवाहेतर संबंधों की संभावना भी बढ़ गई है। इसके अलावा, कामकाजी जीवन की व्यस्तता, भावनात्मक दूरी और आपसी संवाद की कमी भी दंपत्तियों के बीच दरार पैदा करती है, जिससे कई बार लोग बाहरी संबंधों की ओर आकर्षित हो जाते हैं।
why are extramarital affairs increasing in india-आंकड़ों की नजर में एक्स्ट्रा मैरिटल संबंध
भारत में एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स के आंकड़े धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) और अन्य सामाजिक अध्ययनों के अनुसार, भारत में शादी के बाहर संबंध बनाने के मामले अब पहले की तुलना में अधिक खुले तौर पर सामने आ रहे हैं। NFHS-5 की रिपोर्ट के अनुसार, औसतन 2.1% विवाहित पुरुष और 1.7% विवाहित महिलाएं स्वीकार करती हैं|
कि उनके शादी के बाहर शारीरिक संबंध हैं। यह आंकड़े समाज में रिश्तों के प्रति बदलती सोच और बढ़ते खुलेपन को दर्शाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि असली संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि सामाजिक दबाव के चलते कई लोग इस विषय पर खुलकर बात नहीं करते।
why are extramarital affairs increasing in india-महिलाओं के विवाहेतर संबंध
भारतीय समाज में महिलाओं के विवाहेतर संबंधों को लेकर खुलापन अपेक्षाकृत कम है, लेकिन अब महिलाएं भी इस मामले में पीछे नहीं हैं। NFHS-5 के अनुसार, 1.7% विवाहित महिलाएं स्वीकार करती हैं कि उनके शादी के बाहर संबंध हैं। यह आंकड़ा पुरुषों की तुलना में कम है, लेकिन पिछले वर्षों की तुलना में इसमें वृद्धि देखी गई है।

महिलाओं के विवाहेतर संबंधों के पीछे भावनात्मक असंतुष्टि, पति से दूरी, या दांपत्य जीवन में रोमांस की कमी जैसी वजहें प्रमुख मानी जाती हैं। इसके अलावा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सोशल मीडिया की पहुंच ने भी महिलाओं को अधिक स्वतंत्र और मुखर बनाया है। आज की महिलाएं अपनी इच्छाओं और जरूरतों के प्रति अधिक सजग हैं, और यदि उन्हें अपने रिश्ते में संतुष्टि नहीं मिलती, तो वे बाहरी संबंधों की ओर आकर्षित हो सकती हैं।
why are extramarital affairs increasing in india-शादी के बाद संबंध न बन पाने की समस्या
शादी के बाद भी कई महिलाओं की सेक्स लाइफ संतोषजनक नहीं होती। विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 10-15% विवाहित महिलाएं ऐसी हैं जिनकी शादी के बाद शारीरिक संबंध नहीं बन पाते या बहुत कम बनते हैं। इसके पीछे पति-पत्नी के बीच भावनात्मक दूरी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, या आपसी तालमेल की कमी जैसे कारण होते हैं। कई बार सामाजिक दबाव, संकोच या पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते भी महिलाएं अपनी इच्छाओं को दबा देती हैं, जिससे दांपत्य जीवन में असंतोष और दूरी बढ़ जाती है। यह असंतोष कई बार विवाहेतर संबंधों की ओर भी ले जा सकता है।

why are extramarital affairs increasing in india-पुरुषों के विवाहेतर संबंध
NFHS-5 के अनुसार, 2.1% विवाहित पुरुषों ने स्वीकार किया कि उनके शादी के बाहर शारीरिक संबंध हैं। यह आंकड़ा महिलाओं की तुलना में थोड़ा अधिक है, लेकिन यह भी ध्यान देने योग्य है कि पुरुषों में इस विषय पर खुलकर बात करने की प्रवृत्ति अधिक है। पुरुषों के विवाहेतर संबंधों के पीछे मुख्य रूप से दांपत्य जीवन में असंतोष, नई उत्तेजना की तलाश, या भावनात्मक और शारीरिक जरूरतों की पूर्ति न होना जैसे कारण होते हैं। बदलती सामाजिक सोच, आर्थिक स्वतंत्रता और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की उपलब्धता ने भी पुरुषों के लिए ऐसे संबंध बनाना आसान कर दिया है। कई बार पुरुष अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने या एकरसता से बचने के लिए भी ऐसे संबंधों की ओर अग्रसर होते हैं।

why are extramarital affairs increasing in india-विवाहेतर संबंधों के सामाजिक और मानसिक प्रभाव
एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स का असर केवल दांपत्य जीवन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। इससे पति-पत्नी के बीच अविश्वास, तनाव, और भावनात्मक दूरी बढ़ जाती है। बच्चों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे उनका मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। कई बार ऐसे संबंधों के कारण तलाक, घरेलू हिंसा और मानसिक बीमारियां भी बढ़ जाती हैं। समाज में विवाह की संस्था पर भी सवाल उठने लगते हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर होता है।

why are extramarital affairs increasing in india-बदलते रिश्तों में संवाद और समझ की जरूरत
आज के दौर में जहां व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजी इच्छाओं को महत्व मिल रहा है, वहीं रिश्तों में संवाद और समझ की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। दांपत्य जीवन में यदि कोई असंतोष या दूरी महसूस हो, तो खुलकर बात करना, एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और जरूरत पड़े तो विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। इससे न केवल रिश्ते मजबूत होते हैं, बल्कि विवाहेतर संबंधों की संभावना भी कम हो जाती है। रिश्तों में पारदर्शिता, विश्वास और आपसी सम्मान बनाए रखना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है, जिससे दांपत्य जीवन संतुलित और खुशहाल रह सके।