Anil Ambani loan fraud- अनिल अम्बानी के घर CBI की छापेमारी, 17000 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी का खुलासा!

गुरुवार, 4 अगस्त को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े 17,000 करोड़ रुपयों के कथित ऋण धोखाधड़ी मामले में अपनी जांच का विस्तार कर दिया। इस प्रक्रिया में अनिल अंबानी को पूरे नौ घंटों तक पूछताछ के लिए बुलाया गया। पूछताछ के दौरान अंबानी ने मांगे गए दस्तावेज जमा करने के लिए एक सप्ताह का समय आग्रह किया। यह मामला मुख्य रूप से उनकी कंपनियों पर लगे फंड डायवर्जन, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध रूप से ऋण वितरण के आरोपों पर केंद्रित है।

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आशंका: बैंक अधिकारियों की मिलीभगत!

ED ने जहां अंबानी के कई शीर्ष प्रबंधकों को समन भेजा वहीं 39 अलग-अलग बैंकों से सवाल पूछे कि क्यों इन डिफॉल्ट्स के बारे में समय रहते रिपोर्ट नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार, इन बैंकों के अधिकारियों पर शक है कि उन्हें ये घोटाले पता थे, लेकिन उन्होंने चुप्पी साध रखी थी और संभवतः कुछ ने ‘किकबैक’ भी लिए। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पैसा वास्तव में किस-किस के पास गया और कितने लोगों ने फंड डायवर्जन में सहभागिता की।

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बड़ी कार्रवाई: कंपनियों और ठिकानों पर छापे

जांच के दौरान ED ने दिल्ली, मुंबई, भुवनेश्वर और कोलकाता में भी कई कंपनियों और दफ्तरों पर छापेमारी की। विभाग के अनुसार ये छापे एक फर्जी बैंक गारंटी रैकेट से भी जुड़े हैं, जिसका संबंध अंबानी समूह की कंपनियों से माना जा रहा है। परिसरों पर रेड के दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेज़, डिजिटल डेटा और कंप्यूटर उपकरण बरामद हुए, जिनकी समीक्षा अभी जारी है।

कंपनियों की भूमिका: लाखों करोड़ रुपये के घोटाले का जाल

ED के दस्तावेज़ों के अनुसार, Reliance Home Finance Ltd (RHFL) पर ₹5,901 करोड़, Reliance Commercial Finance Ltd (RCFL) पर ₹8,226 करोड़, और Reliance Communications पर ₹4,105 करोड़ का बकाया है। ये कंपनियां लगभग 20 सार्वजनिक और निजी भारतीय बैंक, जैसे कि SBI, ICICI, Axis, HDFC, Bank of India, UCO Bank, और Punjab and Sind Bank के कर्जदार हैं। Yes Bank से 2017-19 के बीच करीब ₹3,000 करोड़ रुपए के लोन संदिग्ध तरीके से इन कंपनियों को दिए गए और फिर कथित रूप से शेल कंपनियों में ट्रांसफर हुए।

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