प्रधान न्यायाधीश (CJI) बी आर गवई ने हाल ही में लॉ कॉलेज के छात्रों को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया कि परीक्षा में अपने रैंक पर कभी भी ज्यादा ध्यान न दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा के अंक या रैंक आपको क्या स्तर की सफलता मिलेगी, इसका निर्धारण नहीं करते। असली सफलता मेहनत, समर्पण और काम के प्रति प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है।
http://Baba Bageshwar news- मेरे दो काम कोई कर दे, जिंदगी में कभी दक्षिणा नहीं लूँगा, जानिए 2 काम?
खुद के अनुभव से दी प्रेरणा
सीजेआई गवई ने छात्र जीवन के अपने अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने बताया कि वे पढ़ाई में अच्छे थे, पर अक्सर कक्षाएं छोड़ दिया करते थे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि कॉलेज में उनकी उपस्थिति दर्ज करने का काम उनके दोस्तों ने किया था। परीक्षा में तीसरा स्थान पाने के बावजूद वे आज भारत के मुख्य न्यायाधीश हैं। इस कहानी से उन्होंने छात्रों में आत्मविश्वास जगाने की कोशिश की।
कानूनी शिक्षा में हो रहे बदलाव
बी आर गवई ने कानूनी शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की बात भी कही। उन्होंने बताया कि पांच वर्षीय लॉ कोर्स आने से कानूनी शिक्षा में सुधार हुआ है और अब छात्र बेहतर तरीके से विनियमन, बहस और न्यायिक प्रक्रिया को सीख पा रहे हैं। यह युवा वकीलों के विकास के लिए काफी मददगार साबित होगा।
सफलता का मापदंड मेहनत और समर्पण
सीजेआई ने कहा कि पेशेवर जीवन में सफलता का आधार केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि लगातार कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प, पेशे के प्रति निष्ठा और सेवा भाव होता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे परीक्षा की रैंक या अंक से मायूस न हों, बल्कि खुद की क्षमता और लगन पर विश्वास रखें।