Bombay High Court judgment- कोर्ट का फैसला: हर वैवाहिक विवाद अपराध नहीं, तंज-तनी क्रूरता नहीं!

बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में 27 साल पुराने एक चर्चित मामले पर बड़ा फैसला सुनाया है, जिसने समाज और कानून के क्षेत्र में चर्चा को जन्म दे दिया है। अदालत ने कहा कि पत्नी की सांवली रंगत या खाना बनाने की आदतों पर तंज कसना भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए (क्रूरता) के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

महाराष्ट्र के सतारा जिले के देगांव गांव के युवक सदाशिव रुपनवर को 1998 में एक गंभीर कानूनी लड़ाई में घिरना पड़ा। उनकी पत्नी प्रेमा पांच साल की शादी के बाद अचानक ससुराल से गायब हो गईं और फिर गांव के कुएं से उनका शव मिला। प्रेमा के मायके वालों ने आरोप लगाया कि प्रेमा ने ससुराल में प्रताड़ना के कारण आत्महत्या की।

शुरुआती जांच और ट्रायल कोर्ट का निर्णय

मामले की जांच के बाद पुलिस ने सदाशिव और उनके पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। ट्रायल कोर्ट में सदाशिव के पिता को बरी कर दिया गया, लेकिन सदाशिव को पत्नी पर क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में क्रमशः 1 और 5 वर्ष की सजा सुनाई गई। सदाशिव ने इसके खिलाफ उसी वर्ष बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।

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हाई कोर्ट में क्या हुआ?

जिस्टिस एसएम मोडक की पीठ ने पूरे मामले की बारीकी से समीक्षा की। आरोप था कि पति ने पत्नी की रंगत और खाना बनाने की कला पर अक्सर तंज कसा और दोबारा शादी की धमकी भी दी थी। ससुर के ऊपर भी केवल खाना बनाने को लेकर टिप्पणी का आरोप था। अदालत ने माना कि ये आरोप ‘वैवाहिक जीवन संबंधी घरेलू कलह’ में आते हैं, न कि अपराध की श्रेणी में।

अभियोजन पक्ष और अदालत का विश्लेषण

मामले में अभियोजन ने कहा कि प्रेमा ने माता-पिता से पति के व्यवहार की शिकायतें की थी, लेकिन अदालत ने पाया कि केवल घरेलू झगड़ों को, जिनका सीधा संबंध आत्महत्या से नहीं है, अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि धारा 498ए अंतर्गत क्रूरता का पैमाना उच्च होना चाहिए, केवल मामूली झगड़ों पर सजा नहीं दी जा सकती।

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समाज के लिए संदेश: घरेलू कलह और कानून

यह फैसला सिर्फ एक परिवार या व्यक्ति के लिए राहत नहीं, बल्कि समाज के लिए भी संदेश है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दंपती के बीत छोटे-मोटे झगड़ों को आपराधिक श्रेणी में रखना ठीक नहीं, जब तक उत्पीड़न अत्यंत गंभीर न हो।

कानून की स्थिति: धारा 498ए की परिभाषा

अदालत ने अपने फैसले में विस्तार से कहा कि धारा 498ए का प्रयोग तभी होगा, जब पति या ससुरालजन की ओर से प्रताड़ना की पुष्टि हो। शादीशुदा जीवन के सामान्य झगड़े—जैसे खाना बनाने, रंग आदि—के आधार पर अपराध साबित नहीं माना जा सकता।

फैसले का व्यापक असर

यह फैसला शादी, घरेलू विवाद और कानूनी प्रक्रिया में संतुलन स्थापित करता है। इससे साफ होता है कि प्रत्येक वैवाहिक विवाद को क्रूरता या गंभीर अपराध मानकर सजा नहीं दी जा सकती, जब तक उच्च स्तर की मानसिक या शारीरिक क्रूरता न हो।

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