भारत का हालिया “दिल्ली से भागो” नाम का एक्शन देशभर में सुर्खियों का केंद्र बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, यह मिशन राष्ट्रीय सुरक्षा और इंटरनल नेटवर्क से जुड़े खतरों को खत्म करने के लिए गृह मंत्रालय द्वारा संचालित था। इस अभियान के तहत कई संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई और कुछ अहम गिरफ्तारियां भी हुईं।
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मिशन की घोषणा के समय से ही बांग्लादेशी प्रशासन की नजर इस ऑपरेशन की दिशा पर टिकी हुई थी। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक्शन दोनों देशों के बीच सीमा पार होने वाली आपराधिक गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई का संकेत है।
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट आई सामने
गृह मंत्रालय ने हाल ही में “दिल्ली से भागो” मिशन की पूरी रिपोर्ट साझा की है। इस रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया है कि यह ऑपरेशन अचानक नहीं था, बल्कि लंबे समय से एक विस्तृत खुफिया योजना के तहत चलाया जा रहा था। मंत्रालय ने मिशन में शामिल सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई, खुफिया निगरानी और टारगेट लोकेशन्स का भी उल्लेख किया है।
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रिपोर्ट बताती है कि इस मिशन की वजह से कई अवैध नेटवर्क और क्रॉस-बॉर्डर गैंग सक्रियता पर अंकुश लगा है। साथ ही दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में संदिग्ध तत्वों की पहचान के लिए नई तकनीक का भी उपयोग किया गया।
बांग्लादेश पर असर और राजनीतिक संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि भारत का यह ऑपरेशन बांग्लादेश के लिए एक चेतावनी जैसा है। “दिल्ली से भागो” नाम भले ही एक प्रतीकात्मक संदेश हो, लेकिन इससे साफ होता है कि भारत अपनी सीमा सुरक्षा और आंतरिक स्थिरता के प्रति बेहद गंभीर है।
बांग्लादेश के अधिकारियों ने भी इस मिशन पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि भारत के अंदरूनी कदम उनके देश के लिए भी एक ‘wake-up call’ हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि दक्षिण एशिया में सुरक्षा सहयोग और सख्ती अब अगला एजेंडा बन सकता है।



