बिहार में विधानसभा चुनाव से चार महीने पहले शुरू किए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रोग्राम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। यह कदम मतदाता सूची की सटीकता और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया था। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने कई आरोप लगाए हैं, जिन्होंने देश की राजनीति की दिशा मोड़ दी है।
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विपक्षी दलों का आरोप: वोट चोरी की संभावना
विपक्ष ने SIR प्रोग्राम को लेकर चुनाव आयोग पर वोट चोरी का गंभीर आरोप लगाया है। उनका दावा है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ी की जा रही है, जिससे सत्ताधारी दल को अनुचित लाभ मिल सकता है। विपक्षी नेताओं ने कहा है कि यह चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाने वाला मामला है।
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मुख्य चुनाव आयुक्त का जवाब: आरोप निराधार
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने विपक्ष के आरोपों को तर्कहीन और निराधार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग ने पूरी पारदर्शिता और कानून के अनुरूप ही SIR प्रक्रिया को अंजाम दिया है। आयोग ने मतदान के दौरान किसी भी बाधा या गड़बड़ी से बचाव के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका, निर्णय अभी दूर
विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। याचिका में आरोप लगे हैं कि वोटर सूची में गलतफहमी और गड़बड़ी मतदान प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। हालांकि अदालत ने अभी तक इस मामले में कोई निर्णायक आदेश नहीं दिया है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियां तेज होती जा रही हैं।