Gaza food crisis- गाजा में भोजन की किल्लत, भुखमरी और कुपोषण ने मचाई तहलका

गाजा में पिछले कई महीनों से भुखमरी का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। खाद्य विशेषज्ञ और स्वास्थ्य अधिकारी बार-बार चेतावनी दे रहे थे कि अगर जरूरी राहत सामग्री नहीं मिली तो भूख और कुपोषण की समस्या और गंभीर हो सकती है। करीब 21 लाख की आबादी वाले इस क्षेत्र में व्यापक स्तर पर भोजन की कमी और पोषण की कमी विकराल रूप ले रही है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का अनुमान है कि लगभग पांच लाख व्यक्ति खतरनाक स्तर की भूख का सामना कर रहे हैं, जबकि दस लाख से अधिक लोग आपातकालीन भूख के प्रभाव में हैं।

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सहायता सामग्री की कमी से बढ़े संकट

इस संकट के पीछे इजरायल द्वारा लगाई गई सहायता पर रोक एक मुख्य कारण है। जनवरी से गाजा के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में खाद्य और दवा की आपूर्ति लगभग ठप्प हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक मई के बाद से कई सौ लोग भोजन न मिलने या सहायता पाने के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं। महिलाओं और बच्चों में कुपोषण के मामले बहुत बढ़ गए हैं, जहां अब तक लगभग 70,000 बच्चों को तत्काल उपचार की जरूरत है।

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रोजमर्रा की जिंदगी में बढ़ती मुश्किलें

राहत सामग्री की भारी कमी के कारण, गाजा के अधिकांश इलाके में सामुदायिक किचन और भोजन वितरण केंद्र लगभग बंद होने के कगार पर हैं। हर दिन हजारों लोग घंटों की कतार में लगकर भोजन पाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार खाली हाथ लौटना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अभी तक आधिकारिक रूप से अकाल घोषित नहीं हुआ है, लेकिन स्थिति बेहद गंभीर होती जा रही है।

कुपोषण और बीमारियों का भयावह चक्र

गाजा के अस्पताल लगातार कुपोषण से प्रभावित रोगियों से भरे हुए हैं। कुपोषित बच्चों में डायरिया और निमोनिया जैसी बीमारियां तेजी से फैल रही हैं, जो जानलेवा साबित हो रही हैं। चिकित्सा सुविधाएं अत्यंत सीमित और अपर्याप्त हैं, जिससे उपचार में बाधा आ रही है।

हमास पर उठते आरोप और विवाद

इजरायल की सरकार और सेना का आरोप है कि हमास राहत सामग्री का दुरुपयोग कर रहा है, जिससे आम जनता तक सहायता नहीं पहुंच पा रही। आरोप है कि युद्ध के दौरान 15 से 25 प्रतिशत राहत सामग्री हमास द्वारा कब्जा कर ली गई, जिसका उपयोग लड़ाकों में बांटने या उच्च कीमतों पर बेचने में होता है। हालांकि, कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूह और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिनिधि इस दावे का समर्थन नहीं करते और इसे राजनीतिक आरोप मानते हैं।

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