Haridwar news- हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में भगदड़, छह की मौत, दर्जनों श्रद्धालु घायल!

हरिद्वार के विश्वप्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर मार्ग पर रविवार को हुई भयानक भगदड़ ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। सावन के महीने में रविवार की सुबह भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर की ओर बढ़ रही थी। इसी दौरान अचानक फैली अफवाह ने ऐसा भयावह मंजर पैदा कर दिया, जिसने कई परिवारों की खुशियों को पल में उजाड़ दिया। इस हादसे में कम से कम छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई है जबकि 25 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

भगदड़ की वजह: अफवाह ने मचाया हड़कंप

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मंदिर की सीढ़ियों पर अचानक करंट दौड़ जाने की अफवाह तेजी से फैल गई। लोग बुरी तरह घबरा गए और जगह छोड़कर भागने लगे। लोगों की कोशिश थी कि वे खुद को किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंचा दें। इसी दौरान भीड़ एक-दूसरे को धक्का देती आगे बढ़ने लगी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। इस भगदड़ में कई वृद्ध, महिलाएं और बच्चे दबकर गिर पड़े। खबर लिखे जाने तक स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन की टीम मौके पर डटी रही।

सावन और श्रद्धालुओं की अपार भीड़

सावन का महीना शुरू होते ही हरिद्वार सहित उत्तर भारत के तमाम शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है। रविवार और छुट्टी के कारण इस बार श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में रही। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन पूरी कोशिश में था कि भीड़ प्रबंधन किया जाए, लेकिन फिर भी इस अप्रत्याशित घटना को रोका नहीं जा सका। स्थानीय लोगों के अनुसार, इतनी अधिक भीड़ ने आपदा की स्थिति जैसी बना दी थी। भीड़ का दबाव बढ़ते ही भगदड़ को पूरा परिसर संभाल नहीं सका।

राहत कार्य और प्रशासनिक पहल

हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ, पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। घटनास्थल पर तत्काल राहत अभियान शुरू किया गया। घायल श्रद्धालुओं को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। जिला प्रशासन ने मृतकों और घायलों के परिजनों को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है और विशेष चिकित्सा दल अस्पतालों में घायलों का इलाज कर रहे हैं।

चश्मदीदों के बयान: पलभर में बदला माहौल

मंदिर में मौजूद कई श्रद्धालुओं ने बताया कि सबकुछ सामान्य था, तभी अचानक अफवाह की वजह से लोग दौड़ने लगे। मंदिर मार्ग पर धक्का-मुक्की बढ़ गई और दर्जनों महिलाएं और बच्चे गिरकर घायल हो गए। कुछ लोगों ने बताया कि, यदि समय रहते श्रद्धालुओं को रोकने के लिए कोई पुख्ता कदम उठाए जाते, तो इतनी बड़ी दुर्घटना शायद टल सकती थी। चश्मदीदों ने बताया कि कई लोग मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन अफरातफरी के माहौल के कारण किसी की आवाज सुनना मुश्किल हो गया था।

हरिद्वार में पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

हरिद्वार सहित देशभर के बड़े धार्मिक स्थलों पर भीड़ के कारण इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। खासकर सावन, श्रावण मास अथवा अन्य प्रमुख पर्वों पर प्रशासन के सामने भीड़ प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन जाता है। मंदिरों के अलावा रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और सार्वजनिक आयोजनों में ऐसी घटनाओं के समाचार अक्सर मिलते रहे हैं, जिससे सुरक्षा इंतजामों की पोल खुलती है।

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