प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान भारतीय-अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नई ऊर्जा देखने को मिली है। जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा से मुलाकात के साथ ही विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में भारत-जापान के संबंधों को मजबूती मिली है। इस शिखर बैठक में दोनों देशों के बीच चंद्रयान-5 मिशन को लेकर रणनीतिक साझेदारी स्थापित की गई। मोदी की यह यात्रा क्षेत्रीय सहयोग की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रही है, जिसमें आर्थिक, सुरक्षा और वैज्ञानिक मामलों पर गहन चर्चा हुई।http://Maratha agitation impact on Mumbai- मराठा आन्दोलन ने थामी मुंबई की रफ़्तार, आज से मनोज जरांगे का भूख हड़ताल!
चंद्रयान-5 मिशन पर ऐतिहासिक समझौता
बैठक के दौरान भारत और जापान ने चंद्रयान-5 मिशन को लेकर महत्वपूर्ण समझौता किया है, जिसके तहत दोनों देश चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग की योजना बनाएंगे। यह सहयोग न केवल दो देशों के वैज्ञानिकों को एक साथ काम करने का अवसर देगा, बल्कि चंद्रमा के अनछुए हिस्सों की खोज में भी योगदान देगा। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA और भारत की ISRO के बीच यह साझेदारी अभिनव वैज्ञानिक प्रयोगों के द्वार खोलने वाली है।
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वैज्ञानिक साझेदारी का नया आयाम
चंद्रयान-5 मिशन के साथ भारत-जापान की वैज्ञानिक साझेदारी में एक नया आयाम जुड़ गया है। इसमें दोनों देशों के वैज्ञानिक साझा तकनीक और संसाधनों का उपयोग करेंगे, जिससे भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की संभावना बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जापान के उन्नत रोबोटिक्स और भारत के मजबूत सॉफ्टवेयर सिस्टम का मेल चंद्रमा की सतह पर पूर्ववर्ती मिशनों की तुलना में बेहतर आंकड़े जुटाने में सक्षम होगा।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की महत्ता
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग की योजना को लेकर वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय बेहद उत्साहित है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस इलाके में पानी के बर्फ के भंडार होने की संभावना है, जिससे भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए संसाधन जुटाना आसान होगा। साथ ही यह क्षेत्र सूर्य की किरणों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित रहता है, जिससे शोध के लिए नई जानकारी सामने आ सकती है।