मध्य प्रदेश में चल रही इंदौर-बिलासपुर ट्रेन की B3 कोच से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुईं अर्चना तिवारी आखिरकार 13 दिनों की खोज के बाद सुरक्षित मिल गई हैं। मंगलवार को नेपाल बॉर्डर पर भारतीय और नेपाली पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में उनकी लोकेशन ट्रेस की गई और उन्हें वापिस लाने में सफलता मिली। इस मामले ने इलाके के लोगों और अर्चना के परिजनों में राहत की सांस भर दी है।
संदिग्ध हालात में लापता होने से मचा था हड़कंप
घटना के दिन इंदौर-बिलासपुर ट्रेन में यात्रा कर रही अर्चना तिवारी अचानक गायब हो गई थीं। ट्रेन जब बिलासपुर स्टेशन पहुंची, तब उनके परिवार ने जब जांच की तो वह कोच में नहीं मिलीं। परिजनों ने तुरंत जीआरपी व आरपीएफ में शिकायत दर्ज कराई। इस घटना की खबर सोशल मीडिया और स्थानीय चैनलों पर तेजी से वायरल हो गई, जिसके बाद मामले को लेकर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया।
पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच से मिली सफलता
अर्चना की तलाश के लिए पुलिस ने रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। उनके मोबाइल लोकेशन को ट्रैक किया गया और जिस इलाके में उनका आखिरी सिग्नल मिला था, वहां स्थानीय पुलिस टीम भेजी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ की विशेष टीम भी जांच में जुटी रही। पुलिस ने कोच के यात्रियों से भी पूछताछ कर तमाम संभावित सुरागों की तलाश की।
हैरान कर देने वाली कहानी, पुलिस ने पेश किया पूरा मामला
बुधवार को पुलिस द्वारा पेश की गई कहानी ने सबको चौंका दिया। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि अर्चना किसी निजी कारणवश स्वेच्छा से घर से निकली थीं। हालांकि, अभी पुलिस गहराई से जांच कर रही है कि कहीं इस पूरे घटनाक्रम में कोई संगठित गिरोह, मानव तस्करी या कोई अन्य आपराधिक एंगल तो नहीं है। पुलिस ने फिलहाल अर्चना की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें परिजनों के हवाले कर दिया है।