यह फैसला पिछले साल 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के हमले के बाद लिया गया है, जिसमें खुफिया खामियों का खुलासा हुआ था। अमन प्रमुख मेजर जनरल श्लोमी बिंदर ने सर्वसमावेशी समीक्षा के बाद यह सुधार लागू करने का निर्देश दिया। अब हर अमन अधिकारी और जवान को अरबी भाषा और इस्लामी संस्कृति की जानकारी दी जाएगी।
नए विभाग का उद्देश्य: अरबी और इस्लामी अध्ययन का विस्तार
यह नया विभाग न केवल भाषा, बल्कि इस्लामी रीति-रिवाज और क्षेत्रीय बोलियों जैसे इराकी और यमनी (हौती) पर भी विशेष ध्यान देगा। स्थानीय विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की मदद से सैनिकों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा, जिससे वे बेहतर विश्लेषण और संचालन कर सकेंगे।
टेलेम विभाग की पुनः स्थापना: स्कूल स्तर पर अरबी को बढ़ावा
आईडीएफ ने घोषणा की है कि छह साल पहले बंद किया गया टेलेम विभाग फिर से शुरू किया जाएगा। यह विभाग मिडिल और हाई स्कूल के छात्रों के बीच अरबी भाषा और मध्य-पूर्वी अध्ययन को बढ़ावा देगा, जिससे युवाओं में भाषाई और सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ेगी।
शिक्षा नीति की मुख्य योजना
रिपोर्ट के अनुसार, अगले वर्ष के अंत तक अमन के सभी जवानों को इस्लामी अध्ययन और आधे से अधिक को अरबी भाषा की गहन शिक्षा दी जाएगी। इसमें साइबर और तकनीकी स्टाफ भी शामिल होंगे ताकि उनका कार्य क्षेत्र बेहतर ढंग से सांस्कृतिक संदर्भ समझ सके।
क्षेत्रीय बोली और व्यवहारिक समस्याओं पर फोकस
हालांकि यमन में हूती विद्रोहियों के रिकॉर्डिंग समझने में कठिनाई हुई, जो मुख्यतः ‘खात’ नामक पौधे के सेवन के कारण बोली की अस्पष्टता से जुड़ी थी। इसके हल के लिए विविध अरबी बोलियों और व्यावहारिक संवाद पर जोर दिया जाएगा।
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सैन्य और सामाजिक प्रभाव
टेलेम विभाग के पुनः संचालन से केवल सेना में ही नहीं, बल्कि प्रमुख शैक्षिक संस्थानों में भी अरबी और इस्लामी ज्ञान को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पूरे समाज में भाषाई और सांस्कृतिक समझ बनेगी।
वरिष्ठ अधिकारियों की राय
अमन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब तक भाषा और संस्कृति के क्षेत्र में अपेक्षित मजबूती नहीं आई थी। उनका कहना है कि सैनिकों को ‘अरब गांव’ के बच्चों जैसे तो बनने की जरूरत नहीं, लेकिन भाषा, संस्कृति और धर्म की गहरी समझ उनके काम को बेहतर बनाएगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्व
इस नई पहल को न केवल देश के लिए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है। यह कदम खुफिया विफलताओं को सही करने के साथ-साथ बहुसांस्कृतिक संवाद और सहिष्णुता को बढ़ावा देगा। इस प्रकार इज़राइल की सुरक्षा और शिक्षा नीति में नया युग शुरू होगा।