मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में दो कुख्यात नक्सलियों के आत्मसमर्पण ने राज्य में नई उम्मीद की किरण जगा दी है। इन सरेंडरों के कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को दावा किया कि प्रदेश अब पूरी तरह से नक्सलवाद से मुक्त हो चुका है।
सीएम ने कहा कि नक्सलवाद का यह अंत प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रीय अभियान का परिणाम है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 26 जनवरी 2026 तक देशभर से नक्सलवाद समाप्त करने की अंतिम समय-सीमा तय की है, और मध्य प्रदेश ने यह लक्ष्य पहले ही हासिल कर लिया।
नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति की नई शुरुआत
बालाघाट, मण्डला और डिंडोरी जैसे जिले कभी नक्सली गतिविधियों के लिए कुख्यात माने जाते थे। लेकिन अब वहां विकास की नई हवा बह रही है। प्रशासन और सुरक्षा बलों की सतर्कता ने न केवल नक्सलियों के नेटवर्क को तोड़ा, बल्कि आम जनता के बीच विश्वास भी कायम किया।
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सीएम मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी योजनाओं के माध्यम से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनविश्वास का माहौल बनाया है। अब इन इलाकों में बच्चे स्कूल जा रहे हैं, किसान अपनी जमीन पर काम कर रहे हैं, और लोग भयमुक्त जीवन जी रहे हैं।
सुरक्षा बलों और जनता का योगदान सराहनीय
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सुरक्षा बलों, स्थानीय पुलिस और आम नागरिकों के योगदान की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, “यह जीत केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर उस नागरिक की है जिसने शांति की राह चुनी।”
