Mamata Banerjee protests NITI Aayog- नीति आयोग की रिपोर्ट पर ममता बनर्जी ने विरोध जताया, माफ़ी की मांग !

नीति आयोग की एक रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल को गलत तरीके से बिहार दिखाने पर राज्य में राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नीति आयोग की उपाध्यक्ष को पत्र लिखकर इसे राज्य की अस्मिता का अपमान बताया और सार्वजनिक माफी व सुधार की मांग की। तृणमूल कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना की है। इस गलती को लेकर केंद्र-राज्य संबंधों पर सवाल उठे हैं और राजनीतिक हलकों में नाराजगी है। अब सभी की नजरें नीति आयोग के जवाब और सुधारात्मक कदमों पर टिकी हैं।

नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की पहचान को गलत तरीके से दर्शाने के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के मानचित्र पर गलती से बिहार का क्षेत्र दिखा दिया गया, जिससे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कड़ा विरोध जताया है। इस गलती को लेकर राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है और केंद्र-राज्य संबंधों में एक बार फिर तल्खी देखने को मिली है।

Mamata Banerjee protests NITI Aayog- मुख्यमंत्री ने जताई कड़ी नाराजगी

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नीति आयोग की उपाध्यक्ष सुमन के बेरी को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। पत्र में उन्होंने कहा कि यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं, बल्कि राज्य की अस्मिता और गरिमा का सीधा अपमान है। ममता बनर्जी ने इस चूक को एक राष्ट्रीय स्तर की संस्था की ‘घोर गैरजिम्मेदारी’ बताया और नीति आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब नीति-निर्माता और नागरिक इन दस्तावेजों पर भरोसा करते हैं, तब ऐसी गलतियां बेहद गंभीर हैं।

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NITI Aayog public apology demanded for state map error

सार्वजनिक माफी और सुधार की मांग

मुख्यमंत्री ने नीति आयोग से तत्काल सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफी की मांग की है। साथ ही, उन्होंने रिपोर्ट में सुधारात्मक कदम उठाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त व्यवस्था लागू करने की बात कही। ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि राज्य की पहचान से जुड़ी ऐसी चूकें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी और केंद्र की संस्थाओं को अधिक जिम्मेदारी से काम करना चाहिए।

तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर जताया विरोध

सिर्फ मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया पर नीति आयोग की आलोचना की है। पार्टी ने एक पोस्ट में याद दिलाया कि कैसे भाजपा सरकार ने पहले योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग बनाया था, जिसे बंगाल के गौरव से जोड़कर देखा जाता था। पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ममता बनर्जी को एक बार नीति आयोग की बैठक में घंटों इंतजार कराया गया और उनका माइक्रोफोन बंद करवा दिया गया था, जिससे उन्हें अपमानित होना पड़ा था।

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केंद्र-राज्य संबंधों पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय और संवेदनशीलता की कमी को उजागर कर दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि ऐसी घटनाएं न केवल प्रशासनिक लापरवाही का संकेत देती हैं, बल्कि राज्यों की अस्मिता और अधिकारों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती हैं। अब सभी की निगाहें नीति आयोग पर टिकी हैं कि वह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नाराजगी का क्या जवाब देता है और आगे क्या कदम उठाता है।

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