नेपाल के विभिन्न हिस्सों में मंगलवार को छात्रों के नेतृत्व में सरकार विरोधी प्रदर्शन फिर तेज हो गए, जिसमें युवा और छात्रों के भारी जत्थे सड़कों पर उतर आए। इन प्रदर्शनों की शुरुआत सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने से हुई थी, जिसने विद्यार्थियों को गुस्से में ला दिया और वे व्यापक राजनीतिक जवाबदेही की मांग करने लगे।
सोशल मीडिया बैन के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा फूटा
बीते शुक्रवार को नेपाल सरकार ने ग्यारह प्रमुख सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसमें फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल थे। इस कदम का विरोध करते हुए हजारों छात्रों ने सोमवार से ही राजधानी काठमांडू समेत विभिन्न शहरों में प्रदर्शन शुरू कर दिए और सरकार से प्रतिबंध हटाने की मांग की।
पर्याप्त प्रमाण और मंत्रियों के इस्तीफे
सोमवार को हुए हिंसक टकराव में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस, पानी की बौछार और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया, जिसके चलते कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई और 300 से अधिक घायल हुए। हालात इतने बिगड़ गए कि नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक और कृषि मंत्री रामनाथ अधिकारी ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। सरकार ने देर रात सोशल मीडिया प्रतिबंध वापस लेने का ऐलान किया।
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पूरे देश में व्यापक हिंसा और प्रदर्शन
कठोर कर्फ्यू के बावजूद छात्र और युवा समूह मंगलवार को भी सड़कों पर उतरते रहे और विभिन्न इलाकों में प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के इस्तीफे की मांग करते रहे। प्रदर्शनकारियों ने मंत्रियों के घरों पर हमला किया, टायर जलाकर सड़कों पर जाम लगाया, और “केपी चोर, देश छोड़” जैसे नारे लगाए। कई स्थानों पर पुलिस और सेना की तैनाती करनी पड़ी, लेकिन छात्रों का विरोध शांत नहीं हुआ।



