बालासोर के प्रतिष्ठित फकीर मोहन कॉलेज में एक छात्रा के आत्मदाह मामले ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। 20 वर्षीय बीएड छात्रा ने कथित यौन उत्पीड़न और कॉलेज प्रशासन की निष्क्रियता से आहत होकर कॉलेज परिसर में ही आग लगा ली थी। इलाज के दौरान एम्स भुवनेश्वर में उसकी मृत्यु हो गई। यह घटना न केवल ओडिशा, बल्कि पूरे देश में छात्र सुरक्षा और लैंगिक उत्पीड़न के मामलों को लेकर चिंता का विषय बन गई है।
एबीवीपी नेताओं पर कार्रवाई, दो गिरफ्तार
इस आत्मदाह प्रकरण की जांच में बड़ा मोड़ तब आया जब क्राइम ब्रांच की टीम ने ऑल इंडिया विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के दो नेताओं को गिरफ्तार किया। इनमें शुभ्र संबित नायक, जो संगठन के स्टेट ज्वाइंट सेक्रेटरी हैं, और ज्योति प्रकाश बिस्वाल, संस्थान का छात्र, शामिल हैं। दोनों पर छात्रा को आत्मदाह के लिए उकसाने का सीधा आरोप है। गिरफ्तारी के तुरन्त बाद उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
जांच में मिले अहम सबूत
क्राइम ब्रांच ने जांच के दौरान आरोपी छात्रों के मोबाइल व सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांचकर्ताओं के मुताबिक, ज्योति प्रकाश बिस्वाल के मोबाइल से 30 मिनट का एक वीडियो मिला है, जिसमें आत्मदाह की घटना की गंभीरता और उससे जुड़े हालात स्पष्ट दिखाई देते हैं। टीम ने कॉलेज, पेट्रोल पंप और आसपास के इलाकों के 50 से अधिक लोगों से पूछताछ भी की, जिससे मामले की तह तक पहुंचा जा सके। यह वीडियो न्यायिक कार्रवाई में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है।
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कॉलेज प्रशासन पर भी सवाल
मामले में पहले ही कॉलेज के प्रधानाचार्य दिलीप घोष और शिक्षा विभागाध्यक्ष समीर कुमार साहू को गिरफ्तार किया जा चुका है। छात्रा ने मृत्युपूर्व बयान और अपनी शिकायत में प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था और प्रशासनिक लापरवाही की बात भी कही थी। कई छात्रों और परिजनों ने प्रशासन पर छात्रा पर समझौते का दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। कॉलेज प्रशासन द्वारा वक्त पर कार्रवाई न किए जाने के कारण छात्रा मानसिक रूप से टूट गई थी, जिसका परिणाम इतना बड़ा और दुखद निकला।
राजनीति और छात्र संगठन की भूमिका
इस संवेदनशील प्रकरण में छात्र संगठनों के बीच गुटबाजी तथा पीड़िता को चुप कराने के प्रयासों के भी आरोप लगे हैं। जांच में सामने आया है कि कॉलेज के एक गुट ने 1 जुलाई को 71 छात्रों के संयुक्त पत्र में पीड़िता के आरोपों को “झूठा” बताते हुए उसके निलंबन की मांग तक की थी। इस बीच सोशल मीडिया और कैंपस में पीड़िता के खिलाफ चरित्र हनन अभियान चलाया गया, जिससे युवती गहरे अवसाद में चली गई थी।