संसद के मानसून सत्र में आज राज्यसभा की कार्यवाही विशेष चर्चा के साथ आरंभ हुई, जिसमें राष्ट्र सुरक्षा से जुड़े बहुचर्चित “ऑपरेशन सिंदूर” पर गहन बहस की जा रही है। इस बहस की शुरुआत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिनके साथ विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई। दोनों पक्षों की ओर से लगभग 16 घंटे तक विचार-विमर्श का अनुमान है, जिससे सभागार में उत्सुकता और गंभीरता का माहौल बना हुआ है।
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सुरक्षा नीति पर केंद्र की मुखरता
रक्षा मंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए देश की सुरक्षा नीति का स्पष्ट उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि “ऑपरेशन सिंदूर” की रूपरेखा पाकिस्तान में आतंकी ढांचों को समाप्त करने के उद्देश्य से बनाई गई थी। रक्षा मंत्री ने जोर दिया कि यह अभियान फिलहाल स्थगित किया गया है क्योंकि सेना ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को पूरा कर लिया है, लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान की ओर से किसी प्रकार की शत्रुतापूर्ण कार्रवाई होती है, तो यह ऑपरेशन फिर से जारी किया जा सकता है।
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विपक्ष की मांग और जवाब तलब
विपक्ष ने सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की कि इस ऑपरेशन के दौरान क्या कोई भारतीय वायुसेना का विमान या जवान हताहत हुआ है। इसके अलावा, विपक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कथित बिचौलिए की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि इस बीच भारत और अमेरिका के बीच किसी प्रकार की आपसी बातचीत या व्यापार डील नहीं हुई, और भारत ने ऑपरेशन तथा उसके प्रत्येक निर्णय को पूर्णतः स्वतंत्र रूप से अंजाम दिया।
प्रधानमंत्री की प्रशंसा और दृढ़ रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष तौर पर राज्यसभा और लोकसभा में रक्षा मंत्री एवं विदेश मंत्री के वक्तव्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” के माध्यम से भारत ने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के मुद्दे पर अपनी बात मजबूती से रखी है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ऑपरेशन सिंदूर – पृष्ठभूमि और सामरिक सफलता
22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद “ऑपरेशन सिंदूर” की योजना बनाई गई, जिसमें 22 निर्दोष नागरिकों की हत्या के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था। इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाया। रक्षा मंत्री के अनुसार, 22 मिनट चले इस ऑपरेशन में आतंकी ढांचे को निर्णायक क्षति पहुंचाई गई, जिसमें 100 से अधिक आतंकी मारे गए।