संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की हालिया रिपोर्ट में यह सामने आया है कि पहलगाम आतंकी हमले के पीछे द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) की बड़ी भूमिका रही। इसमें सदस्य देशों ने साफ तौर पर कहा कि यह हमला लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के समर्थन के बिना मुमकिन नहीं था। रिपोर्ट के मुताबिक, TRF और LeT के बीच गहरा संबंध है, और यहां तक कि TRF को LeT का ही दूसरा नाम भी बताया गया।
TRF की पृष्ठभूमि और गतिविधियां
द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) की स्थापना वर्ष 2019 में केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद हुई थी। खुफिया एजेंसियों का कहना है कि TRF का गठन LeT की छवि छुपाकर एक स्थानीय संगठन की तरह प्रस्तुत करने के लिए किया गया था। TRF के अधिकांश सदस्य पहले से ही LeT और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे गुटों से जुड़े रहे हैं।
पहलगाम हमला: जिम्मेदारी की दावेदारी
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के अनंतनाग क्षेत्र में हुए इस आतंकी हमले में 26 नागरिकों की जान चली गई। हमले के तुरंत बाद TRF ने अपनी जिम्मेदारी ली, हालांकि लश्कर-ए-तैयबा का नाम प्रत्यक्ष रूप से सामने नहीं आया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आतंकी संगठनों की बदलती रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वे अपने पुराने नाम की जगह नए नाम का इस्तेमाल करते हैं।
वैश्विक कार्रवाई तेज
हमले के बाद अमेरिका ने TRF को विदेशी आतंकी संगठन घोषित कर दिया। साथ ही, TRF के संबंध LeT से जुड़े होने के कारण, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी निंदा की गई। भारत सरकार ने TRF और LeT के संबंधों के पर्याप्त प्रमाण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पेश किए हैं, जिससे वैश्विक सहयोग और मजबूत हुआ है।
पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पाकिस्तान ने TRF का नाम संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट से हटवाने की कोशिश की। वहीं पाकिस्तानी अधिकारियों ने TRF पर लगे आरोपों को निराधार बताया है, जबकि भारत ने साक्ष्य के साथ LeT-TRF गठजोड़ की पुष्टि की है।
आतंकवाद पर भारत की नीति
भारत सरकार ने 2023 में TRF को गैरकानूनी घोषित किया और संगठन के प्रमुख नेताओं को आतंकवादी सूची में डाला। सरकार बार-बार यह स्पष्ट कर चुकी है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है और वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस दिशा में प्रयास कर रही है।