Paush Month 2025 start- आज से शुरू हुआ पौष का महीना, इस महीने में ये चार काम किए तो होगा नुकसान

हिंदू धर्म में पौष मास को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से फलदायी माना गया है। पंचांग के अनुसार, यह महीना जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है तब प्रारंभ होता है। यह समय आत्मचिंतन, साधना और ईश्वर भक्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। पौष का महीना इस वर्ष आज से आरंभ हो चुका है और पूरे भारत में इसके धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गए हैं।

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मांगलिक कार्यों पर रोक, पर पूजा-पाठ का महत्व

पौष मास में विवाह, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक होती है, क्योंकि यह मास देवताओं के विश्राम का समय माना जाता है। हालांकि, इस माह में पूजा, व्रत, ध्यान और उपासना करना अत्यंत शुभ माना गया है। यह समय आत्मशुद्धि और मन की पवित्रता का काल होता है, इसलिए लोग इस अवधि में ज्यादा से ज्यादा सूर्य देव की उपासना करते हैं।

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छोटा पितृ पक्ष: पितरों का श्राद्ध और तर्पण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौष मास को छोटा पितृ पक्ष भी कहा जाता है। इस माह में पितरों की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करने की परंपरा है। ऐसा करने से पितृ दोष का निवारण होता है और परिवार में सुख-समृद्धि आती है। बहुत से लोग इस अवधि में गरीबों को अन्न, वस्त्र और गौ-सेवा का दान करते हैं।

सूर्य देव की उपासना से मिलता शुभ फल

पौष महीने में सूर्य की आराधना विशेष रूप से की जाती है। प्रतिदिन सुबह जल में रोली, अक्षत और लाल पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य देने से सौभाग्य और आरोग्य प्राप्त होता है। यह कार्य व्यक्ति के जीवन से ग्रह दोषों का निवारण करता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पौष मास में इन कार्यों से रहें दूर

पौष महीने में कर्ज लेना, नया व्यापार शुरू करना या विवाह जैसी क्रियाएँ करना अशुभ माना गया है। साथ ही, इस अवधि में क्रोध, लालच और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखना शुभ फलदायी रहता है। धर्मग्रंथों के अनुसार, यह महीना साधना और संयम का काल होता है।

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