लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 25 विपक्षी दलों के सांसद संसद भवन के मैकर द्वार से पैदल मार्च निकाल कर भारत के चुनाव आयोग के कार्यालय तक जा रहे हैं। यह मार्च चुनावी विवादों और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर किया जा रहा है। विपक्ष के सांसदों का आरोप है कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूचियों में सुधार और सत्यापन (स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू-एसआईआर) के नाम पर लाखों मतदाताओं के मताधिकार छीने हैं। यह मार्च लोकतंत्र की रक्षा और मतदाता अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक है।
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दिल्ली पुलिस की सख्त सुरक्षा और सात जगहों पर लगाई गई बैरिकेडिंग
राहुल गांधी के नेतृत्व वाले इस मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। रास्ते में कुल सात जगहों पर बैरिकेडिंग लगाई गई है। कई पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं ताकि किसी अप्रिय घटना को रोका जा सके और यातायात व्यवस्था सुचारू बनी रहे। पुलिस का कहना है कि मार्च के लिए किसी प्रकार की अनुमति नहीं मांगी गई थी, जिसके कारण वह विशेष सतर्कता बरत रही है।
चुनाव आयोग और भाजपा पर वोट चोरी के गंभीर आरोप
इस मार्च से पहले राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग और सत्ताधारी भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने महाराष्ट्र और कर्नाटक की मतदाता सूचियों का हवाला देते हुए बड़े पैमाने पर फर्जी वोटरों और डुप्लीकेट नामों का मुद्दा उठाया। राहुल गांधी का कहना है कि भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और जनता के वोट अधिकारों पर संकट मंडरा रहा है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें भ्रामक बताया और राहुल गांधी से सबूत मांगे।
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शशि थरूर सहित विपक्षी नेताओं का समर्थन और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी के आरोपों को गंभीर बताते हुए चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र की साख बचाना अत्यंत जरूरी है और इसे किसी प्रकार से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों और मतदाताओं के हित में सच्चाई सामने आनी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इन आरोपों का समर्थन किया है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण पर विवाद और सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत हलफनामा
बिहार सहित कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद बढ़ गया है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के नाम पर लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें चुनाव आयोग से जवाब मांगा गया है। आयोग ने हलफनामा देकर कहा है कि केवल नियमों के अनुसार नाम हटाए जाएंगे और किसी भी पात्र मतदाता को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा।