मुंबई की राजनीति में मंगलवार की शाम हलचल तब बढ़ गई जब पुलिस का काफिला महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के घर ‘कृष्णकुंज’ पहुंचा। राज ठाकरे के घर पुलिस के पहुंचने की खबर मिलते ही मीडिया और समर्थकों की भीड़ उनके घर के बाहर जमा हो गई। पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।
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पुलिस टीम का पहुंचना और नोटिस की कोशिश
स्थानीय पुलिस सूत्रों के अनुसार, राज ठाकरे से जुड़े एक पुराने विवाद या बयान के सिलसिले में नोटिस देने के लिए पुलिस टीम उनके आवास पर पहुंची थी। जैसे ही अधिकारी घर में दाखिल हुए, वहां मौजूद लोगों में हल्की बेचैनी देखने को मिली। बताया जाता है कि राज ठाकरे उस समय घर पर मौजूद नहीं थे, लेकिन उनके बेटे अमित ठाकरे वहां मौजूद थे।
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अमित ठाकरे ने नोटिस लेने से किया इनकार
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने जब अमित ठाकरे को नोटिस सौंपने की कोशिश की, तो उन्होंने नोटिस लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कथित तौर पर यह कहा कि वे अपने पिता के वकीलों से परामर्श किए बिना कोई दस्तावेज स्वीकार नहीं करेंगे। इस रवैये के बाद पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा।
राजनीतिक हलचल और विरोधियों की प्रतिक्रिया
जैसे ही यह खबर फैली, महाराष्ट्र की सियासत फिर से गरमा गई। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया, जबकि सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि सब कुछ कानून के दायरे में हो रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर चर्चाएं तेज हैं, जहां लोग इसे ‘राजनीतिक दबाव’ और ‘लोकप्रियता बढ़ाने की रणनीति’ दोनों रूपों में देख रहे हैं।



