टाटा समूह ने हाल ही में ‘फ्यूचर रेडी’ बनने के संकल्प के तहत कंपनी की रणनीतियों और नीतियों में व्यापक बदलाव की घोषणा कर दी है। समूह के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने बताया कि यह बदलाव कंपनी को बदलती दुनिया, नई तकनीकों और ग्राहकों की नई मांगों के अनुरूप ढालने के लिए आवश्यक है।
नई तकनीक और बाज़ार की चुनौतियां
टाटा समूह विभिन्न क्षेत्रों—जैसे ऑटोमोबाइल, स्टील, एविएशन और डिजिटल रिटेल—में प्रतियोगिता और वैश्विक बदलाव का सामना कर रहा है। कंपनी खास तौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड जैसी नई तकनीकों में बड़े निवेश करने के साथ अपने कारोबार को भविष्यकालिक बनाना चाहती है|
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आईटी कर्मचारियों में नाराजगी और आशंका
कंपनी की इस रणनीति से टाटा की आईटी फर्म टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) में तकरीबन 12,000 कर्मचारियों को इस वर्ष हटाने की घोषणा की गई है, जो कुल कार्यबल का लगभग 2% है। अधिकतर प्रभावित कर्मचारी मध्य और वरिष्ठ स्तर पर हैं, जिनकी स्किल्स या तो बदलते व्यवसाय की मांग के अनुरूप नहीं हैं या पुनः तैनाती संभव नहीं हो पा|
कंपनी की सफाई और समर्थन
TCS के सीईओ के. कृतिवासन ने सफाई दी कि यह फैसला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण नहीं बल्कि स्किल गैप, नई तकनीकों की जरूरत और कार्यशैली में बदलाव के चलते लिया गया है। कंपनी ने यह भी कहा कि प्रभावित कर्मचारियों को पुनःस्किलिंग, रिडिप्लॉयमेंट प्रोग्राम और उचित सेवरेंस पैकेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं|