गुजरात के वडोदरा जिले में बुधवार को एक बड़ा हादसा हुआ, जब महिसागर नदी पर बना करीब 40 साल पुराना गंभीरा पुल अचानक ढह गया। इस हादसे में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हादसा उस वक्त हुआ जब पुल पर कई वाहन और लोग एक साथ गुजर रहे थे। पुल के गिरते ही दो ट्रक, दो वैन और एक ऑटोरिक्शा समेत कई वाहन नदी में जा गिरे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिए गए।
40-year-old bridge collapse- राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमें
हादसे की सूचना मिलते ही गुजरात स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (एसडीआरएफ) की टीमें मौके पर पहुंच गईं। गोताखोरों की मदद से नदी में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। स्थानीय प्रशासन भी मशीनों और बोट के जरिए मलबा हटाने और फंसे हुए लोगों को निकालने में जुटा है। बुधवार सुबह वडोदरा के कलेक्टर अनिल धमेलिया ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया और मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी लापता लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहेगा।
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जर्जर पुल और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
गंभीरा पुल की हालत पिछले कई वर्षों से खराब बताई जा रही थी। स्थानीय लोगों ने कई बार प्रशासन को पुल की जर्जर स्थिति के बारे में चेताया था, लेकिन भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रही। हादसे के बाद प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर 40 साल पुराने इस पुल की मजबूती की समय-समय पर जांच क्यों नहीं की गई। जानकारी के अनुसार, 15 दिन पहले ही स्थानीय पुलिस और पंचायत प्रतिनिधियों ने पुल का निरीक्षण किया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
हादसे के चश्मदीदों की आपबीती
हादसे के वक्त पुल पर मौजूद लोगों ने बताया कि अचानक पुल हिलने लगा और तेज आवाज के साथ उसका एक हिस्सा नदी में समा गया। एक पिकअप चालक ने बताया कि जैसे ही उन्हें खतरे का अहसास हुआ, वे गाड़ी से कूद गए और किसी तरह अपनी जान बचा पाए। वहीं, कई वाहन नदी में गिर गए और कुछ लोग तैरकर किनारे पहुंचने में सफल रहे। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई और कई लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे।
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जांच के आदेश और जिम्मेदारी तय करने की मांग
घटना के बाद प्रशासन ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही, मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की गई है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस हादसे ने एक बार फिर पुलों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।