जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को अपने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति का पद छोड़ दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को इस्तीफ़े का पत्र सौंपा। इस खबर के आने के बाद देश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। उनकी बीमारी और डॉक्टर की सलाह को मुख्य कारण बताया गया है।
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चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीख का किया ऐलान
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 9 सितंबर 2025 को मतदान के साथ पूरा हो जाएगा। नामांकन भरने की अंतिम तारीख 21 अगस्त है। दोनों Houses के सांसद नए उपराष्ट्रपति के लिए वोट देंगे। इसी दिन मतगणना भी हो जाएगी और नतीजे घोषित हो जाएंगे। चुनाव संविधान के मुताबिक पारदर्शी और निष्पक्ष होगा।
इस्तीफे के पीछे की राजनीति
धनखड़ ने इस्तीफे में स्वास्थ्य की बात कही, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि कुछ बड़े मतभेद भी थे। विपक्ष का आरोप है कि उन्हें दबाव में इस्तीफा देना पड़ा जबकि सरकार ने इस पर कोई साफ बयान नहीं दिया। वहीं कुछ राजनीतिक जानकार इसे संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने की वजह भी मानते हैं।
संसद का अंतरिम प्रबंधन
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह इस वक्त उपराष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उपराष्ट्रपति के चुनाव तक वे राज्यसभा की कार्रवाई देखते रहेंगे। संसद के कुल 788 सदस्य आगामी चुनाव में भाग लेंगे।
संभावित उम्मीदवार और राजनीतिक जंग
दोनों बड़े राजनीतिक गठबंधनों NDA और INDIA गठबंधन की ओर से संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चा जोरों पर है। एनडीए पिछड़ा वर्ग से जुड़े नेताओं को प्राथमिकता दे रही है। वहीं विपक्ष गठबंधन भी एक मजबूत साझा उम्मीदवार पर काम कर रहा है, जिससे मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है।
चुनाव की प्रक्रिया और इसका महत्व
भारत में उपराष्ट्रपति का चुनाव सीधे जनता द्वारा नहीं होता, बल्कि संसद के सदस्यों की वोटिंग से तय होता है। हर सांसद का वोट इस चुनाव में निर्णायक होता है। चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखने की बात कही है। इस चुनाव का देश की राजनीतिक तस्वीर पर बड़ा असर होगा, खासकर लोकसभा और राज्यसभा में मौजूदा स्थितियों को देखते हुए।