केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारी और 65 लाख पेंशनर्स आठवें वेतन आयोग के इंतजार में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने जनवरी 2025 में इस आयोग की घोषणा की थी, लेकिन अब छह महीने से अधिक समय हो जाने के बाद भी इसकी अधिसूचना जारी नहीं हुई है। कर्मचारी और पेंशनर्स इस बात को लेकर चिंतित हैं कि प्रक्रिया में देरी से वेतन और भत्तों में आवश्यक सुधार समय पर नहीं हो पाएगा।
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आयोग की अधिसूचना में देरी, कामकाज को मिली रफ्तार
हालांकि सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से सुझाव एकत्रित कर आयोग गठन की तैयारी तेज कर दी है, लेकिन अभी तक आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। इससे कर्मचारी वर्ग में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार, वेतन आयोग की शासनादेश जारी होने के बाद ही वेतन सुधार संबंधी सिफारिशें स्पष्ट होंगी।
वेतनमान और भत्तों में संभावित वृद्धि
अगले वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़कर लगभग ₹41,000 तक पहुंचने का अनुमान है। साथ ही फिटमेंट फैक्टर 2.28 के आस-पास रहने की संभावना है। महंगाई भत्ते (DA) को भी 70 प्रतिशत तक बढ़ाकर वेतन में विलय करने की चर्चा है। इससे कर्मचारियों की आय में कुल मिलाकर 30 से 34 प्रतिशत तक का इजाफा हो सकता है।
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पेंशनभोगियों और विभिन्न विभागों पर प्रभाव
आठवां वेतन आयोग न केवल केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन को पुर्ननिर्धारित करेगा, बल्कि पेंशन भत्ते और अन्य कर्मचारी लाभों में भी बदलाव लाएगा। रक्षा, रेलवे, डाक, और शिक्षा जैसे विभिन्न विभागों के कर्मचारी विशेष रूप से इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यह आयोग कर्मचारियों के वित्तीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकार और कर्मचारी संगठनों का संवाद जारी
सरकार विभिन्न कर्मचारी संगठनों से संवाद कर रही है ताकि वेतन आयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता और तत्परता सुनिश्चित की जा सके। अभी तक अधिसूचना न होने की स्थिति में भी, अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि जल्द ही आयोग के गठन तथा सिफारिशों की घोषणा होगी। यह बात सरकार की ओर से संसद में भी कही गई है।