भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की साझेदारी से तैयार बहुचर्चित ‘निसार’ मिशन आज लॉन्च होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की तैयारी श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में अपने अंतिम चरण में है। सूत्रों की मानें तो यह मिशन आज शाम पांच बजकर 40 मिनट पर लॉन्च किया जाएगा, जिसे लेकर देशभर में उत्साह का माहौल है।
निसार मिशन: अंतरिक्ष विज्ञान में भारत-अमेरिका गठजोड़ का नतीजा
‘निसार’ (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) मिशन भारत और अमेरिका के संयुक्त विज्ञान पहल का उम्दा उदाहरण है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह उपग्रह पृथ्वी की सतह की विस्तृत मैपिंग के लिए खासतौर पर बनाया गया है। निसार न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए उपयोगी डाटा जुटाएगा, जिससे जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी संभव हो सकेगी। इस साझा प्रयास से दोनों देशों के तकनीकी आदान-प्रदान को भी मजबूती मिली है।
सतीश धवन स्पेस सेंटर: देश की उम्मीदों का आयाम
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर, भारत के तमाम अंतरिक्ष अभियानों का केंद्र रहा है। आज इसी ऐतिहासिक स्थल से निसार की लॉन्चिंग दुनियाभर की नजरों का केंद्र बनी हुई है। सुरक्षा प्रबंधों से लेकर लॉजिक कंट्रोल रूम तक, हर जगह पूरी सतर्कता बरती जा रही है। वैज्ञानिकों से लेकर इंजीनियरों तक, सभी इस ऐतिहासिक घड़ी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
निसार की तकनीकी उपलब्धियां और वैश्विक महत्त्व
निसार मिशन अपने आप में कई मायनों में अद्वितीय है। इसमें L-बैंड और S-बैंड नामक दो रडार लगे हैं, जो हर मौसम और दिन-रात में पृथ्वी की तस्वीरें ले सकेंगे। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तकनीक फसलों की स्थिति, जंगलों में होने वाले बदलाव, हिमखंडों की गतिशीलता और यहां तक कि भूकंप जैसे भौगोलिक बदलावों की भी सतत निगरानी कर सकेगी। यह मिशन पर्यावरणीय संकटों के पूर्वानुमान और उनकी प्रतिक्रिया में क्रांतिकारी साबित हो सकता है।
निसार से बढ़ेगी आपदा प्रबंधन की क्षमता
समुद्र के बढ़ते जलस्तर, बाढ़, भूस्खलन और सूखा जैसी आपदाओं से निपटने में निसार से मिले डाटा बेहद अहम साबित होंगे। अधिकारियों का कहना है कि इससे प्राकृतिक आपदाओं के खतरे को कम करने, समय पर अलर्ट जारी करने और जल्दी राहत पहुंचाने में बड़ी मदद मिलेगी। नीति-निर्माताओं से लेकर किसानों तक, सभी के लिए इस डाटा का उपयोग बहुआयामी होगा।
नासा और इसरो की साझेदारी: विज्ञान में नए क्षितिज
नासा और इसरो की तकनीकी साझेदारी से भारत को जिस तरह वैश्विक मंच पर वैज्ञानिक पहचान मिली है, वह देश की तकनीकी स्वायत्तता के लिहाज से अहम है। निसार में लगे कई उपकरण अमेरिका में बने हैं, वहीं उपग्रह का ढांचा और लांचिंग प्लेटफॉर्म भारत में विकसित किया गया है। यह मिशन ‘मेक इन इंडिया’ की भावना का भी उदाहरण है।