अयोध्या के नव्य, भव्य और दिव्य श्रीराम मंदिर के शिखर पर लहराता भगवा झंडा पूरे परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का वातावरण रचता है। मंदिर के शिखर पर ध्वजरोहण को शास्त्रों में पवित्र, शुभ और धर्म विजय का संदेश देने वाला अनुष्ठान बताया गया है।
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भगवा ध्वज रामभक्तों के लिए इस बात का संकेत भी है कि अब प्रभु श्रीराम का जन्मस्थान खुले रूप में, अपने पूर्ण वैभव के साथ, विश्व के सामने प्रतिष्ठित हो चुका है। ध्वज का हर लहराना भक्तों के मन में यह भाव जगाता है कि सत्य और धर्म की शक्ति अंततः हमेशा विजयी होती है।
भगवा रंग और धर्म विजय का संदेश
भगवा रंग त्याग, बलिदान, शौर्य और तपस्या का प्रतीक माना जाता है, जो भगवान राम और सूर्यवंशी परंपरा की मूल भावना से जुड़ा है। यह रंग साधु-संतों के वस्त्रों से लेकर युद्धभूमि में धर्म के लिए लड़ने वाले वीरों तक, सनातन संस्कृति के त्यागमय चरित्र को दर्शाता है।
मंदिरों पर फहरता भगवा झंडा यह घोषणा करता है कि इस स्थान पर धर्म, सद्गुण और ईश्वर भक्ति को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। राम मंदिर के शिखर पर लगा यह ध्वज इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसे रामकथा, परंपरा और आधुनिक भारत की आस्था–तीनों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
श्रीराम मंदिर के ध्वज पर बने पवित्र चिन्ह
अयोध्या के श्रीराम मंदिर के भगवा ध्वज पर बनाए गए पवित्र चिन्ह उसके आध्यात्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा देते हैं। इस ध्वज पर प्रमुख रूप से तीन प्रतीकों का उल्लेख किया जाता है – ओम्, सूर्य और कोविदार वृक्ष, जो त्रेता युग की परंपरा और रामायण के प्रसंगों से जुड़े माने जाते हैं।
- ओम्: यह ब्रह्मांड की आदि ध्वनि और सनातन धर्म के आध्यात्मिक मूल का प्रतीक माना जाता है।
- सूर्य: यह भगवान राम के सूर्यवंशी कुल, प्रकाश, ज्ञान और ऊर्जा का द्योतक है।
- कोविदार वृक्ष: रामायण में वर्णित यह वृक्ष माता सीता से जुड़े प्रसंगों और प्रकृति संरक्षण के संदेश के साथ जोड़ा जाता है।



