कानूनी सहायता के क्षेत्र में एक बड़ी पहल के तहत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा ‘वीर परिवार सहायता योजना’ की शुरुआत की जा चुकी है। इस योजना के तहत हर राज्य के सैनिक कल्याण बोर्डों में विधिक सेवा क्लीनिक खोले जाएंगे, जहां सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को निःशुल्क कानूनी सलाह और सहायता मिलेगी। इन क्लीनिकों में पैनल वकील और पैरा-लीगल वालंटियर परिवारों को जरूरी सहायता देंगे, जिससे किसी भी कानूनी विवाद की स्थिति में मार्गदर्शन व न्याय पाना आसानी से संभव हो पाएगा।
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वकीलों का विशेष पैनल रहेगा तैनात
इन अभियान के तहत सैनिक परिवारों की जरूरतों के अनुरूप विशेषज्ञ वकीलों का एक पैनल गठित किया जाएगा। यह पैनल न केवल आधारभूत कानूनी सलाह देगा, बल्कि संपत्ति, पेंशन, उत्तराधिकार, तलाक, भत्ते, मकान किराया, उपभोक्ता अधिकार, और सैन्य नियमों से संबंधित मामलों में परामर्श व अदालत में प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराएगा। अनुशासन, सैन्य सेवा की जटिलताएं और परिवार की अलग-अलग कानूनी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह पैनल ट्रेनिंग प्राप्त पेशेवरों से बनाया जाएगा, जिससे हर विषय की गहराई तक सहायता दी जाए।
जागरूकता अभियानों में दी जाएगी सरकारी योजनाओं की जानकारी
इन अभियानों के दौरान सेना के परिवारों को विभिन्न सरकारी योजनाओं—जैसे पेंशन, ‘ईसीएचएस’ (Ex-Servicemen Contributory Health Scheme), ‘शौर्य पेंशन योजना’ और ट्रांसिशनल कंपन्सेशन स्कीम—की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञ टीम इन परिवारों तक दस्तावेजों, कार्यशालाओं, सेमिनारों व डिजिटल मीडिया के माध्यम से अनेक स्तरों पर जानकारी पहुँचाएगी, जिससे वे अपने हक और सेवाओं का भरपूर लाभ ले सकें।
सामाजिक और भावनात्मक समर्थन भी होगा शामिल
जागरूकता अभियानों में केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और भावनात्मक समर्थन कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे। इसमें काउंसलर्स, सैन्य जीवन के जानकार, और समुदायिक सेवा संस्थाएं मिलकर सैनिकों के परिवारों को तनाव प्रबंधन, विवाह-परामर्श, बच्चों की शिक्षा और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर गाइड करेंगे, ताकि सैनिक निश्चिंत होकर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर सकें।
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राष्ट्रव्यापी स्तर पर आयोजन, हर जिले तक विस्तार
सरकार और सैन्य कल्याण विभाग का इरादा ऐसे अभियान को पूरे देश के जिलों तक पहुँचाने का है। सैनिक परिवारों के बीच पर्चों, वर्कशॉप, गाँव-स्तर पर शिविर, और ऑनलाइन वेबिनार जैसी गतिविधियों के माध्यम से जागरूकता फैलाई जाएगी। जिला-जिला पहुंचकर टीमों द्वारा परिवारों की समस्याएं सुनी जाएंगी और तत्काल समाधान या आगे की विधिक प्रक्रिया के लिए सही दिशा दिखाई जाएगी