भारत में चीतों की बहुप्रतीक्षित अगली खेप पर फिलहाल विराम लग गया है। दक्षिण अफ्रीका सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक भारत में पहले से भेजे गए चीतों की सेहत, अनुकूलन और रहन-सहन की वैज्ञानिक समीक्षा पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी नए चीते को भेजने की प्रक्रिया पर रोक रहेगी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत ने विश्व की सबसे बड़ी चीता।http://PM Kisan Samman Nidhi- पीएम किसान योजना की 20वीं किस्त अब जल्द किसानों के खाते में।
केन्या ने जेनेटिक नियमों के चलते चीते देने से किया इनकार
चीता प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए भारत ने जब केन्या से भी संपर्क साधा, तो वहां के पर्यावरणविदों ने अंतरराष्ट्रीय जेनेटिक नियमों के आधार पर चीतों को भेजने से इनकार कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अलग-अलग उप-प्रजातियों के चीतों का मिश्रण इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) के दिशा-निर्देशों के अनुसार ठीक नहीं है, क्योंकि इससे स्थानीय अनुकूलन में बाधा व आनुवांशिक विविधता पर संकट आ सकता है|
परियोजना के नए देश और भविष्य की रणनीति
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस रोक के मद्देनजर भारत अब फिर से दक्षिण अफ्रीका के साथ सीधी संवाद प्रणाली कायम करने पर विचार कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी जटिलता न हो। इसके साथ ही बोत्सवाना से भी चीते लाने की प्रक्रिया पर चर्चा चल रही है, लेकिन तय समयसीमा लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हो सकी है|
चीतों की निगरानी, मृत्यु दर और महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ
2022 में शुरुआत के बाद अब तक Kuno National Park में कुछ चीतों की मौतें हुईं, जिनमें प्रमुख वजहें लंबे समय तक कैद में रहना, मौसम बदलाव व स्थानीय बीमारी रहीं। हालांकि, इन्हीं प्रयासों से भारत ने हाल में 12 से अधिक चीता शावकों का जन्म भी दर्ज किया है, जिससे परियोजना को नया संबल मिला है|