मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के गर्भ गृह में वीआईपी, नेताओं और प्रभावशाली लोगों के प्रवेश को लेकर इंदौर उच्च न्यायालय की खंडपीठ में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इस याचिका में मंदिर के गर्भ गृह में समान रूप से सभी श्रद्धालुओं के प्रवेश के अधिकार पर सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने इस जनहित याचिका की सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है।
भीड़ और असमानता की शिकायतें
याचिकाकर्ता ने वीआईपी दर्शन व्यवस्था के कारण आम श्रद्धालुओं के अधिकारों में अनियमितता और असमानता की शिकायत की है। मंदिर में सशुल्क वीआईपी दर्शन के लिए अलग-अलग शुल्क (250, 750 और 1500 रुपए) लिए जाते हैं, जिससे सामान्य श्रद्धालुओं को असुविधा और अन्याय महसूस हो रहा है। इस व्यवस्था के तहत वे लोग जो अधिक शुल्क देने में सक्षम हैं, विशेष सुविधाओं का लाभ उठाते हैं, जबकि आम प्रशंसक घंटों प्रतीक्षा करके भी प्रवेश नहीं पाते।
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सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी
सामाजिक कार्यकर्ता संदीप मिश्रा द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मंदिर प्रशासन से इस वीआईपी दर्शन योजना के सम्बंधित दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन मंदिर प्रबंधन ने इन दस्तावेजों को सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने प्रथम और द्वितीय अपील की, लेकिन मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने भी अब तक इस मामले में सुनवाई नहीं की है। हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग को 60 दिनों में इस मामले में जवाब देने का आदेश दिया है।