मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर में लोगों द्वारा बेपरवाह होकर यातायात नियमों की अनदेखी को लेकर हाल ही में गहरा असंतोष जताया। अदालत ने मामले की सुनवाई में साफ कहा कि इंदौर जैसे बड़े और स्मार्ट शहर में सड़कों पर आए दिन नियमों का तोड़ा जाना बेहद चिंताजनक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल निर्देशों और जागरूकता अभियानों से बात नहीं बनेगी, बल्कि कठोर कार्रवाई और भारी जुर्माने जैसे कड़े कदम उठाना अब जरूरी है|
उल्लंघनकर्ताओं पर भारी जुर्माने और सजा की तैयारी
सुनवाई के दौरान जस्टिस विवेक रुसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी ने बताया कि बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वालों पर ‘भारी जुर्माना’ लगाया जाए। यही तरीका नागरिकों में ट्रैफिक नियमों के पालन की संस्कृति विकसित कर सकता है, जैसे स्वच्छता अभियान में हुआ था। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक लोग नियम तोड़ने से डरेंगे नहीं, तब तक बदलाव आना मुश्किल है|
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प्रशासन की नई पहल: ‘नो हेलमेट, नो पेट्रोल’
जिला प्रशासन ने कोर्ट के निर्देशों के बाद एक बड़ा फैसला लिया है। 1 अगस्त से शहर के किसी भी पेट्रोल पंप पर बिना हेलमेट पहुंचे दोपहिया चालकों को पेट्रोल नहीं मिलेगा। प्रशासन ने साफ जानकारी दी कि अगर कोई पेट्रोल पंप इस आदेश का उल्लंघन करेगा, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत उस पर एक वर्ष तक की सजा या 5,000 रुपए तक जुर्माना या दोनों लगाए जा सकते हैं। यह कदम शहर के ट्रैफिक को व्यवस्थित करने और लोगों में जिम्मेदारी की भावना मजबूत करने के मकसद से उठाया गया है|
चौराहों पर सिग्नल, और ट्रैफिक मित्रों की तैनाती
जिला कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों ने रोड सेफ्टी की बैठक में बताया कि ट्रैफिक प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए शहर में अब 100 चौराहों पर आधुनिक ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएंगे। वहीं, ट्रैफिक मित्रों की सक्रिय तैनाती से वाहनचालकों में नियम पालन की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित किया जाएगा। वहीं, ई-चालान व्यवस्था की गति भी और तेज की जा रही है ताकि नियम तोड़ने वाले किसी भी तौर पर बच न पाएं|