हाल ही में महिलाओं की तस्वीरों को बिना उनकी अनुमति के संपादित करने का मामला सामने आया है। इन तस्वीरों में महिलाओं के शरीर के विशिष्ट अंगों को ज़ूम करके अश्लील और आपत्तिजनक रूप में दिखाया गया है। न केवल तस्वीरें बदली गईं, बल्कि उनके नीचे भद्दे और अपमानजनक टिप्पणियां भी लिखी गईं, जिससे महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंची है।http://VIP darshan controversy in Ujjain- महाकालेश्वर मंदिर में VIP प्रवेश को लेकर विवाद, MP उच्च न्यायालय ने फैसला रखा सुरक्षित?
घिनौने कृत्यों का डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होना चिंताजनक
इस प्रकार की तस्वीरें सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन मंचों पर तेजी से फैल रही हैं। अक्सर ये तस्वीरें महिलाओं की सहमति के बिना पोस्ट की जाती हैं और इन्हें भावनात्मक मानसिक उत्पीड़न के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, महिलाओं के खिलाफ भद्दे और घटिया कमेंट्स इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाते हैं।
कानूनी प्रावधान और उनके उल्लंघन की स्थिति
भारत में ऐसी हरकतें सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 66E और 67 के तहत प्रतिबंधित हैं। धारा 66E निजी तस्वीरों को अनुमति के बिना कैप्चर या साझा करने पर तीन साल तक की सजा का प्रावधान करती है, जबकि धारा 67 अश्लील सामग्री के प्रसारण को रोकती है। इसके अतिरिक्त, भारतीय दण्ड संहिता की धारा 354C (भोवैरिज्म) और 509 महिलाएं और पुरुषों के सम्मान की रक्षा करती हैं